पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : देखते-देखते एक वित्तीय वर्ष समाप्त हो गया। आमतौर पर वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन 31 मार्च को सरकारी विभाग ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को बकाया बिल का भुगतान करते हैं। दिसपुर हर साल 31 मार्च में ठेकेदारों को साल के सभी बकाया बिलों का भुगतान करता आया है,लेकिन इस बार मार्च का अंत ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए सुखद नहीं रहा। परिणामत: इस साल राज्य के ठेकेदारों के लिए  रंगाली बिहू फीका होगा।  सोमवार को वित्तीय वर्ष समाप्त हो गया,लेकिन लोक निर्माण विभाग सहित राज्य सरकार के हर विभाग के अधिकांश ठेकेदारों को उनके बिलों का एक पैसा भी नहीं मिला। 31 मार्च को दिसपुर ने ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को देय बिलों का भुगतान नहीं किया जिसके कारण उधार नहीं चुका पाने के कारण उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को ईद की छुट्टी के बाद भी गुवाहाटी के चांदमारी स्थित लोक निर्माण विभाग में कई ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को रात तक इंतजार करने के बाद भी बैरंग लौटना पड़ा। ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं ने ठेके के नाम पर कर्ज लेकर काम पूरा करके विभाग को सौंप दिया, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने साल के अंत में बिलों का भुगतान नहीं किया। अब बिलों का भुगतान न होने के कारण ठेकेदारों को ऋण चुकाने में परेशानी हो रही है। ठेकेदारों की शिकायत है कि केंद्र सरकार और विभिन्न बैंकों द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं के लिए जारी धनराशि में से राज्य सरकार अपने हिस्से का भुगतान नहीं कर पाई है जिसके कारण आबंटित धनराशि वापस चली गई है। यह भी शिकायत है कि सरकार के पास ठेकेदारों के बिलों का भुगतान करने के लिए धन की कमी है,क्योंकि लाभार्थियों को संतुष्ट करने के लिए राजकोष खाली हो चुका है। जिसके कारण कुछ छोटे ठेकेदारों और दिसपुर के आशीष धन्य मुट्ठी भर ठेकेदारों को छोड़कर अधिकांश ठेकेदारों को एक प्रतिशत भी पैसा नहीं मिला है। हालांकि, कुछ ठेकेदारों को जहां 10 करोड़ रुपए  मिलने चाहिए थे, लेकिन उनके बिलों का केवल 10-20 प्रतिशत यानी अधिकतम 2 करोड़ रुपए ही जारी किए गए। फिलहाल राज्य सरकार विभिन्न स्रोतों से प्राप्त राजस्व से किसी तरह कर्मचारियों का वेतन तो दे रही है, लेकिन भाजपा गठबंधन सरकार को लाभार्थीपरक योजनाओं में वित्तीय सहायता के लिए हर महीने स्टॉक की नीलामी कर कर्ज लेना पड़ रहा है। सरकार की बदहाली को लेकर ठेकेदार भाजपा गठबंधन सरकार से नाराज हैं। कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि बिलों का भुगतान न होने पर इस वर्ष ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को बिहू की खुशी नसीब नहीं होगी। आरोप है कि अकेले लोक निर्माण विभाग में ठेकेदारों का 7,000 करोड़ रुपए का बिल बकाया है।