पीएम मोदी और आरएसएस का साथ वर्षों पुराना है और संघ के 100 साल पूरा होने पर पीएम मोदी आरएसएस के नागपुर मुख्यालय पर पहुंचे और स्वयंसेवकों की जमकर तारीफ की। पीएम मोदी ने आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार और गुरुजी गोलवलकर को पुष्पांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संघ का 100 साल पहले बोया गया पेड़ अब वटवृक्ष बन गया है। उन्होंने कहा कि इसी साल आरएसएस की गौरवशाली यात्रा के 100 साल पूरे हो रहे हैं और इस अवसर पर मुझे स्मृति मंदिर जाकर पूज्य डॉ. साहब और पूज्य गुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य मिला है। पीएम मोदी ने डॉ. हेडगेवार और एमएस गोलवलकर के प्रभाव को स्वीकार करते हुए कहा कि मेरे जैसे अनगिनत लोग परम पूज्य डॉक्टर साहब और पूज्य गुरुजी के विचारों से प्रेरणा और शक्ति प्राप्त करते हैं। इन दो महान लोगों को श्रद्धांजलि देना सम्मान की बात है, जिन्होंने एक मजबूत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली भारत की कल्पना की थी। उल्लेखनीय है कि दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना केशव बलराम हेडगेवार ने की थी। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन आरएसएस की स्थापना की गई थी। संघ के प्रथम सरसंघचालक  हेडगेवार ने अपने घर पर 17 लोगों के साथ गोष्ठी में संघ के गठन की योजना बनाई थी।  इस बैठक में हेडगेवार के साथ विश्वनाथ केलकर, भाऊजी कावरे, अण्णा साहने, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी आदि मौजूद थे। संघ का क्या नाम होगा, क्या क्रिया-कलाप होंगे, सब कुछ समय के साथ धीरे-धीरे तय होता गया। उस वक्त हिंदुओं को सिर्फ संगठित करने का विचार था। यहां तक कि संघ का नामकरण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी 17 अप्रैल 1926 को हुआ। इसी दिन हेडगेवार को सर्वसम्मति से संघ प्रमुख चुना गया,लेकिन सरसंघचालक वे नवंबर 1929 में बनाए गए। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नाम अस्तित्व में आने से पहले विचार मंथन हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जरीपटका मंडल और भारतोद्वारक मंडल इन तीन नामों पर विचार हुआ। बाकायदा वोटिंग हुई। नाम विचार के लिए बैठक में मौजूद 26 सदस्यों में से 20 सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना मत दिया, जिसके बाद आरएसएस अस्तित्व में आया। नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे प्रार्थना के साथ पिछले कई दशकों से लगातार देश के कोने-कोने में संघ की शाखाएं लग रही हैं। हेडगेवार ने व्यायामशालाएं या अखाड़ों के माध्यम से संघ कार्य को आगे बढ़ाया। स्वस्थ और सुगठित स्वयंसेवक होना उनकी कल्पना में था।  आरएसएस का दावा है कि उसके करोड़ों प्रशिक्षित सदस्य हैं। संघ परिवार में 80 से ज्यादा समविचारी या आनुषांगिक संगठन हैं। दुनिया के करीब 40 से अधिक देशों में संघ सक्रिय है। बताते चलें कि संघ में सदस्यों का पंजीकरण नहीं होता। ऐसे में शाखाओं में उपस्थिति के आधार पर अनुमान है कि फिलहाल कई लाख स्वयंसेवक नियमित रूप से शाखाओं में आते हैं। संघ ने अपने लंबे सफर में कई उपलब्धियां अर्जित कीं, जबकि तीन बार उस पर प्रतिबंध भी लगा। संघ ने धीरे-धीरे अपनी पहचान एक अनुशासित और राष्ट्रवादी संगठन की बनाई। 1962 में चीन के धोखे से किए हमले से देश सन्न रह गया था। उस वक्त आरएसएस ने सरहदी इलाकों में रसद पहुंचाने में मदद की थी।  इससे प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नेहरू ने 1963 में गणतंत्र दिवस की परेड में संघ को बुलाया था। 1965 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने में संघ ने मदद की थी। 1977 में आरएसएस ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को विवेकानंद रॉक मेमोरियल का उद्घाटन करने के लिए बुलाया था। आरएसएस साफ तौर पर हिंदू समाज को उसके धर्म और संस्कृति के आधार पर शक्तिशाली बनाने की बात करता है। संघ से निकले स्वयंसेवकों ने ही बीजेपी को स्थापित किया। हर साल विजयादशमी के दिन संघ स्थापना के साथ ही शस्त्र पूजन की परम्परा निभाई जाती है।  देश भर में पथ संचलन निकलते हैं। कभी 26 स्वयंसेवकों से शुरू हुआ संघ आज विशाल बटवृक्ष बन गया है और प्रधानमंत्री ने बताया कि यह वटवृक्ष देश के लिए कितना उपयोगी है।