हाल के वर्षों में दुनिया के कुछ देशों ने सुनामी की भयानक त्रासदी झेली है। शोधकर्ताओं की मानें तो समुद्र के जलस्तर में होनेवाली थोड़ी वृद्धि भी सुनामी से होनेवाली तबाही के खतरे को बढ़ा सकती है। इस जलस्तर के बढ़ने की मुख्य वजह जलवायु परिवर्तन होगा। शोधकर्ताओं के मुताबिक, तटीय शहरों में समुद्र का जलस्तर बढ़ने के खतरे से हर कोई वाकिफ है, लेकिन एक नए अध्ययन से पता चला है कि भूंकप के बाद आई सुनामी से तटीय शहरों के अलावा दूर-दूर बसे शहरों और बस्तियों को भी खतरा पैदा हो सकता है। उधर, अमेरिका के वर्जिनिया टेक के एक सहायक प्रफेसर रॉबर्ट वेस ने कहा कि हमारी स्टडी बताती है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से सुनामी के खतरे काफी बढ़ गए हैं, इसका मतलब है कि भविष्य में छोटी सुनामी का भी बड़ा भयानक प्रभाव हो सकता है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर से चीन के मकाउ में मौजूदा जलस्तर पर कृत्रिम सुनामी बनाई और इससे जलस्तर में 1.5 से 3 फुट तक की वृद्धि हुई। दक्षिणी चीन में बसा मकाउ अत्यधिक जनघनत्व वाला तटीय क्षेत्र है जो कि सामान्यतः सुनामी के खतरे से सुरक्षित है। मौजूदा समुद्र के जलस्तर में 8.8 तीव्रता के भूकंप से मकाउ डूब सकता है, लेकिन कृत्रिम जलस्तर में वृद्धि के कारण आए नतीजों ने टीम को हैरान कर दिया। जलस्तर में 1.5 फुट की वृद्धि से सुनामी का खतरा 1.2 से 2.4 बार बढ़ गया जबकि तीन फुट वृद्धि से 1.5 से 4.7 बार बढ़ा। अर्थ ऑब्जर्वेटरी ऑफ सिंगापुर के सीनियर शोधकर्ता लिन लिन ली ने कहा कि हमने पाया कि मध्यम तीव्रता वाले भूकंप से भी सैलाब की तीव्रता बढ़ गई, जो कि मौजूदा जलस्तर में खतरनाक नहीं है, लेकिन उच्च जलस्तर की स्थिति में इससे भीषण सैलाब आ सकता है।