मानसून की बारिश का मजा लेने के साथ सावधानी बरतनी भी काफी जरूरी है। कई बार तो हमारी उठने बैठने वाली जगह पर से अचानक कनखजूरा, कॉकरोच, मकड़ी, मच्छर, केंचुआ निकल आता है। इनके काट लेने से चमड़े में खुजली, रैशेज, जलन, दर्द और इंफेक्शन बढऩे पर मवाद भी आ जाता है। इस सीजन में इन कीड़े-मकोड़ों से बचकर रहना चाहिए क्योंकि नमी के कारण ये जमीन के ऊपर आ जाते हैं और डंक मार सकते हैं। बारिश के बाद अक्सर लाइट के कीड़े जमा होने लगते हैं। इस कारण बच्चों के साथ बड़े भी परेशान हो जाते हैं। खाना में ना गिर जाए इसका डर बना रहता है।

बच्चे अगर पढऩे बैठे हैं तो डर से पढ़ नहीं पाते इसके काटने से जलन, दर्द और फफोले भी पड़ जाते हैं। ये कीड़े अगर काट ले तो उसे एंटीसेप्टिक साबुन लगाकर साफ कर लें। कैलामाइन लोशन से आराम मिलेगा। कीड़े के काटने से होने वाली जलन में बर्फ लगाने से आराम मिलता है। एलोवेरा और शहद लगाने से ढ्ढठ्ठह्यद्गष्ह्ल क्चद्बह्लद्गह्य वाली जगह पर जलन से राहत मिलती है। मच्छर के काटने से खुजली और जलन होने पर प्रभावित जगह पर बेकिंग सोडा और सेब का सिरका मिलाकर लगाने से राहत मिलती है। तुलसी की पत्तियों में एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो कीड़े के डंक को मारने का काम करते हैं। एलोवेरा जेल एक नेचुरल एंटी सेप्टिक एजेंट है, जो कीड़ों के जहर को फैलने से रोकता है।

जिस जगह पर भी कीड़े मकोड़ों ने काटा है उस जगह पर चाबी या उल्टी तरफ से चाकू से रगड़ दें। इससे स्किन में कीड़े का कांटेदार डंक निकल जाता है या हानिकारक पदार्थ स्किन घुस नहीं पाता। बर्फ के टुकड़े को घिसने से भी राहत मिलती है। कीड़े मकोड़े काटने पर नींबू घिसने से खुजली और जलन नहीं होती। साइट्रिक एसिड का एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण इसके असर को कम करता है। प्याज काटकर प्रभावित जगह पर रगडऩे से इसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड कीड़े के डंक को फैलने से रोकता है। बरसात में इन परेशानियों से बचने के लिए सबसे जरूरी चीज है कि हर दिन घरों में हर कोने की सफाई करें। ऐसा करने से बरसाती कीड़े छिपकर नहीं बैठ सकेंगे।