कनाडा, अमरीका, ब्रिटेन तथा आस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थक आतंकियों द्वारा अलगाववादी गतिविधियां चलाने तथा भारतीय राजनयिकों को धमकी देने की घटना पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान देकर कहा है कि खालिस्तानियों की गतिविधियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि पूरी तरह से आतंकी गतिविधियां हैं। मालूम हो कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस संबंध में एक बयान दिया था, जिसको लेकर भारत को कड़ी आपत्ति है। सभी जानते हैं कि कनाडा खालिस्तानियों का गढ़ है, जहां से भारत में गतिविधियां संचालित की जाती हैं। कुख्यात खालिस्तानी हरदीप ङ्क्षसह निज्जर की मौत के बाद खालिस्तानियों ने उसे शहीद घोषित किया है। इसको लेकर कनाडा में 5 जुलाई को खालिस्तान फ्रीडम रैली का आयोजन होगा, जो ग्रेट पंजाब बिजनेस सेंटर से होकर भारतीय दूतावास तक पहुंचेगा।
खालिस्तानियों द्वारा जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं, जिसमें ओटावा स्थित भारतीय दूतावास के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा तथा टोरंटो स्थित महावाणिज्य दूतावास के अपूर्वा श्रीवास्तव का हत्यारा बताया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पिछले सोमवार को कनाडा के नई दिल्ली स्थित उच्चायुक्त को तलब कर कड़ा विरोध व्यक्त किया है। इससे पहले खालिस्तानियों ने पिछले 2 जुलाई को अमरीका के सेनफ्रांसिस्को स्थित महावाणिज्य दूतावास में आग लगाने की कोशिश की। आग पर तुरंत काबू पा लिया गया जिससे जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन इससे अमरीका की नियत पर सवाल उठना वाजिब है। भारत के दबाव के बाद अमरीका ने इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है तथा इसकी जांच एफबीआई को सौंपी है। भारत चाहता है कि गिरफ्तार खालिस्तानियों को आगे की कार्रवाई के लिए भारत को सौंपा जाए। इसी बीच ऐसी खबर है कि सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत ङ्क्षसह पन्नू की अमरीका में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। हालांकि अभी तक किसी भी तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर पन्नू मारा गया है तो यह भारत के लिए राहत की बात होगी।
पन्नू को जुलाई 2020 में यूएपीए कानून के तहत आतंकी घोषित किया जा चुका है। पंजाब पुलिस उसके खिलाफ कपूरथला थाने में राजद्रोह का मामला दर्ज कर चुकी है। इससे पहले खालिस्तान कमांडो फोर्स के प्रमुख हरदीप ङ्क्षसह निज्जर एवं परमजीत की संदिग्ध अवस्था में मौत हो चुकी है। ये सभी भारत में खालिस्तानी गतिविधियों को बढ़ावा देने में लगे हुए थे। पन्नू सबसे खतरनाक आतंकी था जो भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल रहा था। इसने आस्ट्रेलिया, अमरीका, ब्रिटेन एवं कनाडा में भारतीय दूतावासों के सामने प्रदर्शन करवाया था एवं हमले के प्रयास का सूत्रधार था। अमरीका में महावाणिज्य दूतावास पर पहले खालिस्तानियों ने ग्रेनेड भी फेंका था। वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल ङ्क्षसह की बढ़ी गतिविधियों के पीछे पन्नू का हाथ बताया जाता है। फिलहाल अमृतपाल और उसके समर्थक डिब्रूगढ़ की जेल में बंद हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद खालिस्तानी गतिविधियां बढ़ी थी, किंतु केंद्र सरकार के सख्त रुख के बाद उस पर अंकुश लगा।
किसान आंदोलन के दौरान भी पन्नू ने उसकी आड़ में अपनी गतिविधियां बढ़ाई थी। किसान आंदोलन को समर्थन देकर पन्नू ने अपने लिये जमीन तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मोदी सरकार इस मामले में काफी सजग हो गई है। अपने देश में खालिस्तानी आतंकियों पर नकेल कसने के साथ-साथ अपने कूटनीतिक प्रयास से विदेशों में भी इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित देशों पर दबाव डाल रही है। प्रधानमंत्री ने अपनी अमरीकी यात्रा के दौरान वहां के राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी की जो मुलाकात हुई थी, उसमें भी यह मुद्दा उठा था। ब्रिटेन में भारतीय दूतावास के पास खालिस्तानियों द्वारा जो घटना की गई थी उसको लेकर भारत सरकार ने जवाबी कार्रवाई की थी। इसका नतीजा यह हुआ है कि ब्रिटेन घुटनों पर आ गया तथा उसने भारतीय दूतावास के पास कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था कर दी। इस पूरे मामले में भारत सरकार को सतर्क रहना पड़ेगा, ताकि राष्ट्रविरोधी शक्तियां फिर से सर न उठा सके।