फ्रांस इन दिनों हिंसा की आग में झुलस रहा है। बीते मंगलवार को राजधानी पेरिस के पास 17 वर्षीय एक युवक को ट्रैफिक पुलिस की ओर से गोली मारे जाने के बाद देश में हिंसा भड़क उठी। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि बीते पांच दिनों में राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रों दो बार आपातकालीन बैठक बुला चुके हैं। वहां के गृह मंत्री ने कहा कि वह आपातकाल की आशंकाओं को भी खारिज नहीं कर रहे हैं। कई शहर धू-धूकर जल रहे हैं। सरकार सुरक्षा बलों की अधिक तैनाती कर रही है। इस बीच जानना जरूरी है कि आखिर फ्रांस में हिंसा हो क्यों रही है? घटनाओं की शुरुआत के बाद से अब तक क्या हुआ?

स्थिति से निटपने के लिए सरकार क्या कर रही है? क्या देश में आपातकाल लगाने जैसी स्थिति बन गई है? ट्रैफिक स्टॉप पर पुलिस की गोली से मरे किशोर नाहेल का शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि अल्जीरियाई मूल के 17 वर्षीय किशोर की पुलिस की गोली से हुई मौत के बाद पूरे देश में भड़की हिंसा की आग थमी नहीं है। हिंसा चौथी रात भी जारी रही। यहां के शहर नानतेरे में मंगलवार को नाहेल नाम के एक युवक को पुलिस ने गोली मार दी थी। इसके बाद नानतेरे समेत लगभग पूरे देश में हिंसा भड़क उठी थी। इस मौके पर नानतेरे की इब्न बदिस मस्जिद में एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। स्थानीय अखबारों के अनुसार बड़ी संख्या में लोग इसके लिए मस्जिद आए।

इस बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रों ने जर्मनी का अपना दौरा टाल दिया। फ्रांस में हिंसा की चौथी रात स्थिति पर काबू करने के लिए सरकार ने करीब 45 हजार पुलिस अफसरों को तैनात किया है। पुलिस ने जिस 17 वर्षीय नाहेल को गोली मारी, वो अपनी मां की इकलौती संतान था। वो डिलीवरी ब्वॉय का काम करता था और रग्बी का लीग प्लेयर था।  उसकी पढ़ाई व्यवस्थित ढंग से नहीं हुई थी, उसे अपने शहर के नजदीक सरेसनेस के कॉलेज में भर्ती कराया गया था। नानतेरे में उसके घर के आसपास रहने वालों ने उसे अच्छे स्वभाव का किशोर बताया है। वो अपनी मां मॉनिया के साथ रहता था। उसके पिता के बारे में किसी को जानकारी नहीं है। जिस दिन उसे गोली मारी गई उस दिन उसने अपनी मां को ड्यूटी पर जाते वक्तबड़़े प्यार से विदा किया था।

इस बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों का सिलसिला जारी है।  इन दंगों में पुलिस के 79 लोग घायल हुए हैं। राजधानी पेरिस और दूसरे इलाकों में 45,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, उनके साथ हल्की बख्तरबंद गाडिय़ां भी भेजी गई हैं। सरकार का कहना है कि पिछली रातों के मुकाबले शुक्रवार को हिंसा में थोड़ी कमी आई थी। सिर्फ  शुक्रवार की रात ही 1,311 लोगों को हिरासत में लिया गया। इससे पहले किसी भी रात इतनी बड़ी संख्या में लोगों को पकडऩे की नौबत नहीं आई थी। अब तक कुल 2400 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उल्लेखनीय है कि पेरिस के उपनगर नानतेरे में किशोर की मौत के बाद से ही फ्रांस के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हंै। नाराज लोगों ने कई सरकारी इमारतों को भी आग लगा दी है। शनिवार को सरकार के तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक 1350 गाडिय़ों  और 234 इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया।

सार्वजनिक जगहों पर आग लगाने की 2,560 घटनाएं हुई हैं। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती भी दंगाइयों को नहीं रोक पा रही है। फ्रांस के शहरों में पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। पुलिस मर्साय, ल्योन और ग्रेनोब्ले में लूटपाट को रोकने में नाकाम रही। दंगाइयों ने यहां की दुकानों में खूब लूटपाट मचाई। पेरिस और उसके उपनगरों में बारिश के बावजूद दंगा जारी रहा। केवल राजधानी और उसके आसपास के इलाके में भी 406 लोगों को हिरासत में लिया गया। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस ङ्क्षहसा ने पूरे फ्रांस को हिलाकर रख दिया है, इस घटना की जितनी भी ङ्क्षनदा की जाए, वह कम है।

फिर भी, ङ्क्षहसा किसी समस्या का समाधान नहीं है, इसलिए जल्द से जल्द ङ्क्षहसा पर लगाम लगनी चाहिए। समस्या का समाधान जोर-जबरदस्ती या पुलिसिया कार्रवाई से नहीं हो सकती। इसलिए सरकार को सौहार्दपूर्ण तरीके अपनाकर मरहम लगाने की जरुरत है। यदि कोई निर्दोष यूं ही मारा जाता है तो आम आदमी का गुस्सा होना स्वाभाविक है और इन दिनों फ्रांस में यही देखा जा रहा है।