चुनाव आयोग ने असम के लिए परिसीमन मसौदा दस्तावेज जारी कर दिया है। आयोग ने असम के 14 लोकसभा सीटों एवं 126 विधानसभा सीटों को बरकरार रखा है। राज्यसभा के सात सीटों की संख्या के साथ भी कोई छेड़छाड़ नहीं किया गया है। नए मसौदा दस्तावेज के अनुसार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 16 से बढ़ाकर 19 तथा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 8 से बढ़ाकर 9 कर दी गई है। ऊपरी असम में एक सीट की बढ़ोतरी हुई है, जबकि बराक घाटी में एक सीट कम हो गई है। पश्चिम कार्बी आंग्लांग स्वायत्तशासी जिले में विधानसभा क्षेत्रों की संख्या चार से बढ़ाकर पांच कर दी गई है। इसी तरह अब कामरूप मेट्रो जिले में दिसपुर, डिमोरिया, जालुकबाड़ी, गुवाहाटी मध्य और न्यू गुवाहाटी पांच विधानसभा क्षेत्र होंगे। अब कलियाबर की जगह काजीरंगा संसदीय क्षेत्र बनेगा।
कोकराझाड़ एवं डिफू संसदीय क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति के लिए तथा सिलचर संसदीय क्षेत्र को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। लखीमपुर संसदीय क्षेत्र को अनारक्षित रखा गया है। चुनाव आयोग की टीम ने पिछले 26 से 28 मार्च तक राज्य का दौरा किया था और राजनीतिक दलों, जन प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं मुख्य चुनाव अधिकारी के साथ परिसीमन के विषय में उनके सुझावों पर गौर किया था। इस परिसीमन मसौदा दस्तावेज को लेकर घमासान मचा हुआ है। कुछ लोग इसके समर्थन में उतर आये हैं, जबकि विपक्षी पाॢटयां इसका विरोध कर रही हैं। ऐसी खबर है कि पक्ष-विपक्ष के 29 विधायक अपने भविष्य को लेकर ङ्क्षचतित हैं। उनका मानना है कि अनेक विधानसभा क्षेत्रों में भौगोलिक सीमा में परिवर्तन करने से उनका वोट बैंक खिसक जाएगा। इससे अगले चुनाव में उनकी जीत पर ग्रहण लग सकता है। जहां विपक्षी पाॢटयां इस दस्तावेज के लिए चुनाव आयोग को निशाने पर ले रही हैं, वहीं भाजपा इसका स्वागत कर रही है।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग ने भाजपा के इशारे पर परिसीमन का मसौदा तैयार किया है, ताकि चुनाव में भाजपा को लाभ मिल सके। प्रदेश भाजपा ने इस दस्तावेज को असमिया जाति का रक्षा कवच बताया है तथा कहा है कि चुनाव आयोग के वर्तमान पहल से 90 से 100 विधानसभा क्षेत्रों पर भूमि पुत्रों एवं भारतीय मूल के नागरिकों का वर्चस्व होगा। मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने भी परिसीमन मसौदे का स्वागत किया है। उनका कहना है कि जालुकबाड़ी विधानसभा क्षेत्र को तीन हिस्सों में बांटने के बावजूद राज्य हित में हम इसे अच्छा फैसला मानते हैं। लोकसभा एवं विधानसभा क्षेत्रों की भौगोलिक सीमा बदलने से राज्य के 126 सीटों का स्वरूप बदल जाएगा।
राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के कारण 2008 में विधानसभा क्षेत्र के पुनॢनर्धारण को रद्द कर दिया गया था। हालांकि इस बार भी वर्ष 2001 में किये गए जनगणना के आधार पर परिसीमन पूरा किया गया है। इसके खिलाफ उठ रही आवाज पर सुनवाई के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, दोनों चुनाव आयुक्त अनूपचंद पांडेय एवं अरुण गोयल मसौदा प्रस्ताव पर जन सुनवाई के लिए जुलाई में असम का दौरा करने वाले हैं। उस दौरान वे लोग विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के राजनेताओं की शिकायत सुनेंगे। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। अगर वर्तमान परिसीमन मसौदा के आधार पर क्षेत्रों का निर्धारण होता है तो कई राजनेताओं के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा।