वर्षा ऋतु आरंभ हो गया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें उपयोगी कदम बढ़ाना होगा। जल बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। जिससे की आने वाले गर्मी के सीजन में हमें इस साल जैसी परिस्थितियों का सामना ना करना पड़े। पौधारोपण के साथ जल संरक्षित करने के लिए मंथन करना होगा। इस संबंध में प्राध्यापक एवं पर्यावरण मित्रशैली ओझा ने बताया कि हमें जल को बचाने नए आइडियाज पर काम करना होगा। जिससे की आने वाली हमारी पीढ़ी को संकट का सामना ना करना पड़े। तलाब, कुंआ, नदी लगातार सूखते जा रहे हैं।

बरसात के कुछ महीनों में हमें जो पानी मिलता है इसे रोकने अथवा संरक्षित करने कोई भी प्रयास नहीं होता। हमें सभी को निम्नलिखित प्रयास करने होंगे। जैसे घरेलू स्तर पर जल का उचित व संयमित उपयोग एवं उद्योगों में पानी के चक्रीय उपयोग जल संरक्षण में सहायक हो सकते हैं। इस्तेमाल किए हुए पानी का फिर से शौचालयों अथवा बगीचों में फिर से इस्तेमाल और रिसाइकिलिंग करके जल का सदुपयोग करना होगा। इस दिशा में जन-जागरूकता बढ़ाने की अवश्यकता है। वर्षा-जल का संग्रहण करके हम पानी को बचा सकते हैं विभिन्न जलाशयों का निर्माण करके उनमें जल संग्रह करना जल संसाधन का सबसे पुराना उपाय है, इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

भूमिगत जल संरक्षण के लिए भूमिगत जल का कृृत्रिम रूप से पुनर्भरण किया जा सकता है टपकन टैंक/ड्रिप/स्प्रिंकल सिंचाई के उपयोग से सिंचाई जल के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकता है। सीएपी के माध्यम से जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण करके जल के साथ-साथ मृदा का भी संरक्षण किया जा सकता है। यह विधि सामान्यत: पहाड़ी क्षेत्रों में प्रयोग में लायी जाती है। फसल उगाने के तरीकों का प्रबंधन करके जैसे कि कम जल क्षेत्रों में ऐसे पौधों का चयन करके जिनकी पैदावार के लिए कम पानी की जरूरत हो नहरों की तली व नालियों को पक्का करके नहरों-नालियों से बहने वाले अतिरिक्त जल को बचाया जा सकता है।