कर्नाटक एवं हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पांच राज्यों के विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नसीहत का भी पार्टी पर असर पड़ा है। संघ ने अपनी पत्रिका के माध्यम से भाजपा को नसीहत देते हुए कहा था कि पार्टी को आगामी चुनावों के लिए केवल मोदी मैजिक पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। चुनावों में झटका मिलने के बाद भाजपा हाई कमान ने उत्तरी, दक्षिणी एवं पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए अलग-अलग रणनीति बनाने पर काम शुरू कर दिया है। विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय मुद्दों पर भी फोकस करने का निर्णय लिया गया है। उत्तर भारत के राज्यों में हिन्दुत्व एवं जातिगत मुद्दों को उभारने का असर निश्चित रूप से मतदाताओं पर पड़ेगा।

उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा उत्तराखंड जैसे राज्यों में हिन्दुत्व एवं जातिगत समीकरण का असर होगा। धाॢमक मुद्दों का भी असर उत्तरी क्षेत्र के राज्यों पर पड़ेगा। वर्ष 2014 एवं 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा राष्ट्रवाद, हिन्दुत्व एवं भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव जीत कर आई थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में मुद्दा बदलेगा। जनता पहले के मुद्दों के साथ-साथ सरकार द्वारा किये गए मुद्दों पर रिजल्ट चाहेगी। साथ ही कुछ नए मुद्दों को शामिल करना पड़ेगा ताकि मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके। कर्नाटक एवं हिमाचल प्रदेश के चुनावों में जिस तरह मतदाताओं पर क्षेत्रीय मुद्दों का प्रभाव पड़ा उसको लेकर भाजपा को अपनी रणनीति में बदलाव लाने पर मजबूर होना पड़ा है। उत्तरी क्षेत्र के मुद्दों का असर दक्षिण के राज्यों पर शत-प्रतिशत नहीं पड़ सकता। इसलिए भाजपा को मोदी मैजिक के साथ-साथ वहां के स्थानीय मुद्दों को उठाना होगा। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में क्षेत्रीय मुद्दों को उछाल कर ही विजय हासिल की थी। विपक्ष की गोलबंदी को देखते हुए भाजपा ने भी अपने कुनबे का विस्तार करने का निर्णय लिया है।

इसके तहत छोटे-छोटे दलों को अपने पाले में लाने तथा पुराने सहयोगियों से संपर्क करने का अभियान शुरू किया गया है। शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन के लिए हो रही बातचीत इसी पहल का नतीजा है। भाजपा ने अपने केंद्रीय योजनाओं की पहल को पार्टी से जोडऩे की पहल शुरू की है। भाजपा इन योजनाओं के लाभाॢथयों को अपना वोट बैंक बनाने की कोशिश में है। पार्टी ने केंद्र एवं भाजपा शासित राज्यों के सभी मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्र में जाकर सरकार की कामयाबी बताने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राज्यों में पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों को दूर करने की पहल भी शुरू हो चुकी है। राजस्थान में वसुंधरा राजे को मनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पिछले विधानसभा चुनाव में राजस्थान में पार्टी की हार का मुख्य कारण आपसी मतभेद ही रहा। यही कारण है कि भाजपा राज्यों में पार्टी को एकजुट करने में लगी हुई है।