योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद उत्तर प्रदेश में माफियाओं की शामत आ गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने माफियाओं के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू की है। कई माफिया भयभीत होकर राज्य से पलायन कर गए हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो बड़े माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। अतीक अहमद एवं उसके भाई अशरफ को उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई जब पुलिस उसे मेडिकल जांच के लिए ले जा रही थी। अतीक एवं उसके गुर्गों से उत्तर प्रदेश की जनता परेशान थी।  पुलिस ने अतीक के बेटे को भी एन्काउंटर में मार गिराया था। अभी भी अतीक की पत्नी शाइस्ता एवं उसके कुछ गुर्गे फरार हैं। पुलिस उन सभी की तलाश कर रही है।

इसी तरह बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। अदालत ने 32 साल पुराने वाराणसी के बहुचॢचत अवधेश राय हत्या मामले में मुख्तार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। एक साल के दौरान मुख्तार को चार मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन अवधेश राय मामले में उम्रकैद की सजा मिली है। मुख्तार ने अवधेश राय की दिन-दहाड़े हत्या कर दी थी। अवधेश राय मंत्री तथा विधायक रह चुके थे। अवधेश राय उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय के बड़े भाई थे। इसके लिए पिछले 32 वर्षों से संघर्ष चल रहा था। इस मामले में मुख्तार के साथ-साथ भीम ङ्क्षसह, कमलेश ङ्क्षसह, पूर्व विधायक अब्दुल कलाम एवं राकेश भी आरोपी हैं। कमलेश और कलाम की मौत हो चुकी है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के माफियाओं की एक सूची बनाकर कार्रवाई शुरू की है।

अतीक और अशरफ जैसे कई माफिया मारे जा चुके हैं। उनके शूटर पुलिस से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं। सात जून को लखनऊ कोर्ट परिसर में कुख्यात गैंगस्टर एवं मुख्तार के दाहिने हाथ संजीव माहेश्वरी जीवा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना में डेढ़ साल की एक बच्ची और उसकी मां को भी गोली लगी है। हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। हत्यारा वकील की वेश में आया हुआ था। गैंगस्टर संजीव पूर्वांचल के भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्या के मामले में आरोपी था। इस हत्याकांड की जांच के लिए योगी सरकार ने एसआईटी का गठन भी किया है। माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सियासत भी जारी है। लेकिन योगी सरकार अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने कई माफियाओं की संपत्ति पर बुलडोजर चलवाकर मिट्टी में मिला दिया एवं उनकी नगद राशि व अन्य बहुमूल्य संपत्ति भी जब्त कर ली। माफियाओं के खिलाफ अभियान अभी भी जारी है। उत्तर प्रदेश में जिस तरह माफियाओं का राज चल रहा था उससे आम जनता परेशान थी। राजनीतिज्ञों, माफियाओं एवं अधिकारियों की सांठगांठ के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। लेकिन अब योगी सरकार उनकी कमर तोडऩे के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है।