नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड की चार दिवसीय भारत यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तार से चर्चा हुई है। दोनों देशों के बीच कुल सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह आॢथक संकट से जूझ रहे नेपाल की यह यात्रा राजनीतिक व आॢथक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि प्रचंड ने भारत यात्रा से पहले कहा था कि उनका देश भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर आगे बढऩा चाहता है। नेपाल दोनों बड़े पड़ोसी देशों के साथ अपना संबंध बेहतर करना चाहता है। भारत के अन्य पड़ोसी देशों की तरह नेपाल भी चीन के भारी कर्ज जाल में फंसा हुआ है। प्रचंड यह नहीं चाहते हैं कि नेपाल की स्थिति श्रीलंका और पाकिस्तान जैसी हो जाए।
भारत और नेपाल के बीच सदियों से घनिष्ठ संबंध रहा है। प्रचंड ने कहा है कि हम दोनों देशों के संबंधों को हिमालय पहाड़ की तरह ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं। नेपाल से राजशाही खत्म होने तथा कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनने के बाद भारत नेपाल संबंधों में गिरावट देखी गई। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों नेता केपी शर्मा ओली तथा प्रचंड के शासन में चीन की की तरफ झुकाव बढ़ गया। शुरू से ही नेपाल की कम्युनिस्ट पाॢटयां चीन का समर्थक रही हैं। यही कारण है कि उनके शासन में नेपाल में चीन का निवेश बढ़ा, जिससे भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया। भारत हमेशा से नेपाल को संदेह की दृष्टि से देख रहा था क्योंकि चीन भारत के खिलाफ नेपाल में खड़ा हेाकर साजिश रच रहा था।
भारत की समर्थक नेपाली कांग्रेस भी सत्ता से बाहर हो गई थी। पिछले कुछ वर्षों के दौरान केपी शर्मा ओली के शासन में दोनों देशों के संबंध बद से बदतर होते चले गए। प्रचंड यह चाहते हैं कि भारत और चीन को साथ में लेकर संंबंधों को विकसित किया जाए। प्रचंड और मोदी के साथ हुई बैठक के दौरान रक्सौल से काठमांडू तक रेलवे लाइन बिछाने की विस्तृत परियोजना नेपाली सरकार को सौंपी गई है। इसके अलावा भारत नेपाल से दस साल तक 10 हजार मेगावाट जल विद्युत खरीदने का भी सौदा किया है। वर्तमान में भारत नेपाल से 4500 मेगावाट बिजली का आयात करता है। नेपाल भारत के माध्यम से बांग्लादेश को भी विद्युत का निर्यात करना चाहता है। इसके लिए भी नेपाल और भारत के बीच एक समझौता हुआ है। बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से रिमोट कंट्रोल के माध्यम से जयपुर-कुर्था रेलवे लाइन के बिजलपुरा तक विस्तार करने के लिए लोकार्पण किया। भारतीय अनुदान के तहत नवनिॢमत रेल ङ्क्षलक बथनाहा (भारत) से नेपाल सीमा शुल्क यार्ड तक एक भारतीय रेलवे कार्गो ट्रेन का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया गया। इसके अलावा एकीकृृत चेकपोस्ट का भी उद्घाटन किया गया। दोनों देशों के बीच पारगमन संधि के हस्ताक्षरित दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम नेपाल के साथ भविष्य में भी अपनी साझेदारी को सुपरहिट बनाने के लिए काम करेंगे। नेपाल के लोगों के लिए नए रेल रूट्स के साथ-साथ भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों की सुविधा का भी प्रावधान किया गया है। भारत अपने रेल संस्थानों में नेपाल के रेलकॢमयों को प्रशिक्षण देगा एवं बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। सीमा पार डिजिटल पेमेंट के माध्यम से वित्तीय कनेक्टिविटि पर भी काम किया जाएगा। दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा व्यापार समझौता संपन्न किया गया। भारत नेपाल में नैनो ऊर्वरक के कारखाने खोलने का प्रस्ताव दिया है, जिस पर दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि नेपाल ने अपने यहां चीन द्वारा निॢमत दो हवाई अड्डों से उडऩे वाले विमानों के लिए भारतीय एयर रूट को इस्तेमाल करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। भारत का कहना है कि वह नेपाल में चीन निॢमत दोनों हवाई अड्डों से उडऩे वाले विमानों के लिए भारतीय एयर रूट को इस्तेमाल नहीं होने देगा। अभी तक भारत ने चीन के इस अनुरोध पर अपना पत्ता नहीं खोला है। उम्मीद है कि प्रचंड की वर्तमान भारत यात्रा से दोनों देशों के संबंध बेहतर होंगे। लेकिन नेपाल की बातों पर आंख बंद कर विश्वास नहीं किया जा सकता।