यूक्रेन और रसिया के बीच युद्ध इतना लंबा खिंच जाएगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी,परंतु पिछले 15 महीनों से दोनों के बीच लगातार युद्ध जारी है। इस युद्ध का असर पूरी दुनिया के इकोनॉमी पर पड़ा है। परिणामतः एक बार फिर पूरी दुनिया आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है। यूक्रेन पर हमले की शुरुआत 15 महीने पहले हुई थी। रूसी राष्ट्रपति ने इसे विशेष सैन्य अभियान नाम दिया था तब शायद उन्हें भी यह अंदाजा नहीं था कि यह अभियान इतना लंबा चलेगा। नाटो के सहयोग से यूक्रेन तमाम मुसीबतें झेल कर भी रूस के सामने टिका हुआ है। इस बीच अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों और युद्ध को लेकर रूसी लोगों में विरोध के उठते सुरों के बीच से जब तब पुतिन के कमजोर पड़ने की खबरें आती रही हैं। ये और बात है कि इन खबरों की कभी पुष्टि नहीं की जा सकी। अब जर्मन की विदेशी खुफिया एजेंसी बीएनडी का कहना है कि पुतिन के तंत्र में कोई दरार नहीं आई है।
एजेंसी का कहना है कि रंगरूटों की नई भर्ती के साथ रूस अभी भी इस हालत में है कि युद्ध को लंबे दौर तर खींच सके। जर्मन खुफिया सेवा प्रमुख का पुतिन की ताकत के बारे में यह आकलन सही होने के सारे संकेत हैं। अभूतपूर्व आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद रूसी अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। ऊर्जा का उत्पादन और निर्यात जारी है। रूस के आम लोग थोड़े डरे हुए हैं लेकिन पुतिन की सत्ता के खिलाफ कोई गंभीर विरोध नहीं है। युद्ध के तुरंत बाद के दिनों में रूसी मुद्रा की कीमत काफी ज्यादा गिर गई लेकिन बाद के महीनों में वह पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरी। इसी तरह कई और मामलों में रूस कमजोर होता नहीं दिखा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पुतिन के दोस्तों ने अब तक उनका साथ नहीं छोड़ा है। इस युद्ध का इतना दिनों तक खिंच जाना भी एक लिहाज से पुतिन की रूस पर मजबूत पकड़ का एक संकेत है। रूसी लोगों ने स्थानीय रूप से कुछ दिक्कतें देखीं लेकिन वो शुरुआती दिनों की बात है।
बाद के महीनों में ऐसी कोई खबर सामने नहीं आई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट, परमाणु हथियारों और प्राकृतिक संसाधनों के विशाल जखीरे वाले देश को रोकना आसान नहीं होता। युद्ध का नतीजा क्या होगा या फिर यह कब थमेगा इसकी भविष्यवाणी इस वक्त कोई नहीं कर सकता, लेकिन पुतिन ने देश को जिस तरह अपने साथ रखा है उसे लेकर रूसी जनता में उनके समर्थन को लेकर कोई आशंका नहीं दिखती। बीएनडी ने युद्ध शुरू होने के करीब 14 दिन पहले कुछ ऐसी चीजों का पता लगाया जिन्हें किसी और तरीके से परिभाषित नहीं किया जा सकता। रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर धावा बोला था।
बीएनडी प्रमुख काल ने इस आलोचना को भी खारिज किया कि अमरीका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों ने बीएनडी से बहुत पहले हमले की आशंका जता दी थी। उनका कहना है कि उन एजेंसियों ने हमले की आशंका जताई थी जो उनके पर्यवेक्षण पर आधारित था। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस युद्ध के कारण रुस और यूक्रेन के लोग काफी परेशान हैं। उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके दोनों देशों की जनता अपने शासनाध्यक्षों के साथ खड़ी है,यह कोई छोटी बात नहीं है, इससे पता चलता है कि दोनों देशों के शासनाध्यक्ष अपने लोगों के बीच कितने लोकप्रिय हैं और आम लोगों के समर्थन के कारण ही दोनों मैदान में जमें हुए हैं।