बागेश्वर धाम के बाबा धर्मेंद्र शास्त्री पिछले 13 मई से ही बिहार के प्रवास पर हैं। पटना के पास उनका दिव्य दरबार लगा है। जहां लाखों की संख्या में उनके भक्तगण हनुमान कथा को सुनने के लिए इकठ्ठे हो रहे हैं। रोजाना आठ से दस लाख भक्त उनके दिव्य दरबार में अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आ रहे हैं। भक्तों की अनियंत्रित भीड़ को कम करने के लिए बाबा ने अपने दिव्य दरबार को स्थगित करने की घोषणा कर दी थी ङ्क्षकतु उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। भक्तगण टस से मस नहीं हुए तथा भक्तों का तांता लगा रहा। अपने प्रवचन के दौरान बागेश्वर बाबा हिंदु एकता एवं हिंदु राष्ट्र बनाने की बात कर रहे हैं। वे सनातन धर्म के प्रचार के लिए जगह-जगह दिव्य दरबार लगाकर प्रवचन दे रहे हैं। उनके बिहार आगमन को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। जहां भाजपा के बड़े-बड़े नेता बाबा की आगवानी में लगे हैं वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) (यू) तथा कांग्रेस के नेता उनकी आलोचना कर रहे हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि सभी को अपना-अपना धर्म मानने का अधिकार है किंतु किसी के धर्म के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोई एक व्यक्ति देश का संविधान नहीं बदल सकता। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बेटे एवं मंत्री तेज प्रताप ने तो बाबा को बिहार में आने से रोकने के लिए एक अलग फोर्स भी तैयार कर लिया था। तेज प्रताप का कहना था कि हम बाबा को बिहार में घुसने नहीं देंगे। इसके बावजूद बागेश्वर बाबा का भव्य दरबार लगा। राजद के बिहार शाखा के अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने तो बागेश्वर बाबा को दंगाई तक बता दिया तथा कहा कि ऐसे व्यक्ति की जगह जेल में होना चाहिए। बागेश्वर बाबा कांग्रेस नेताओं के निशाने पर भी हैं। दूसरी तरफ मोदी सरकार में कांद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, दूसरे केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, मनोज तिवारी एवं रविशंकर प्रसाद जैसे नेता पूरी तरह से बाबा के आवभगत में लगे हुए हैं। कुल मिलाकर उनका वर्तमान प्रवास भाजपा और दूसरे विपक्षी दलों के बीच टकराव का मुद्दा बन गया है। इस टकराव के पीछे की सियासत को समझना होगा।
धर्मेंद्र शास्त्री जहां भी जा रहे हैं वे हिंदु धर्म एवं सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं। हिंदू राष्ट्र के समर्थन में वे हदू समुदाय को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। बिहार की राजनीति जातीय समीकरण पर निर्भर करती है। बाबा के दरबार में पिछड़े एवं दलित समाज के भक्तगण बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। राजद, जदयू तथा कांग्रेस के वोटर इन्हीं जातियों से ज्यादा आते हैं। इन पाॢटयों का फोकस पिछड़ों एवं दलितों पर होता है। ऐसे में इनको भय है कि अगर बिहार के लोग जातिगत समीकरण से उठकर हिंदू कार्ड के दायरे में आ गए तो इससे भाजपा को चुनाव में काफी लाभ मिलेगा। भाजपा भी चाहती है कि बिहार के वोटर हिंदू छतरी के नीचे इकट्टा हो। यही कारण है कि भाजपा के बड़े-बड़े दिग्गज बागेश्वर बाबा के आसपास मडराते नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने हिंदू कार्ड खेलकर भाजपा को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है।
आज उत्तर प्रदेश में बाबा की जय-जयकार हो रही है। भाजपा चाहती है कि बिहार में भी कोई ऐसा बाबा मिले जो हिंदू कार्ड खेलकर हिंदूओं पर एकजुट करे। फिलहाल में ऐसा कोई नेता नहीं दिखाई दे रहा है जिसमें योगी आदित्यनाथ जैसी काबिलियत हो। धर्मेंद्र शास्त्री भले ही राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं किंतु प्रवचन के माध्यम से वे जितना भी हिंदू समाज को इकठ्ठा करेंगे उससे भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी तथा राजद एवं जदयू जैसे विपक्षी दलों की स्थिति कमजोर होगी। यही कारण है कि राजद, जदयू एवं कांग्रेस के नेता बागेश्वर बाबा पर हमलावर हैं। बाबा ने दिव्य दरबार से उत्साहित होकर आगामी 27 सितंबरो को गया में भी भव्य दिव्य दरबार लगाने की घोषणा की है। लोकसभा चुनाव से पहले बिहार के मुजफ्फरपुर में ऐसा ही कार्यक्रम आयोजित करने की पहल हो रही है। कुल मिलाकर बागेश्वर बाबा का दिव्य दरबार सियासत का केंद्र बन गया है।