कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता चुनाव प्रचार के लिए मैदान में कूद चुके हैं। तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनेता अपनी वाणी की मर्यादा खो रहे हैं। मालूम हो कि 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा के लिए 10 मई को मतदान होना है। यह चुनाव सत्ताधारी भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। कर्नाटक के इस चुनाव में भाजपा तथा कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला दिख रहा है। जनता दल (एस) भी कई सीटों पर भाजपा को टक्कर दे रही है।
कांग्रेस कर्नाटक में जीत दर्ज कर भाजपा पर बढ़त हासिल करना चाहती है ताकि राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश एवं मिजोरम में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का मनोबल बढ़े। भाजपा की तरह कांग्रेस भी कर्नाटक चुनाव में पूरी ताकत झोंक रही है। भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की काफी मांग है। प्रधानमंत्री कर्नाटक में कुल 22 रोड शो करने वाले हैं। प्रधानमंत्री का रोड शो शुरू भी हो चुका है। कर्नाटक भाजपा की तरफ से मोदी के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी की भी मांग है। योगी इस बार कर्नाटक में कुल 36 रैली करने वाले हैं। योगी की जनसभा में लोगों की काफी भीड़ हो रही है। योगी अपनी जनसभा में जिस तरह ङ्क्षहदुत्व का मुद्दा उठा रहे हैं उससे ङ्क्षहदू मतदाता काफी आकॢषत हो रहे हैं। वर्ष 2018 में कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान योगी ने कुल 36 विधानसभा क्षेत्रों में रैली की थी जिसमें भाजपा को 33 स्थानों पर जीत हासिल हुई थी।
इसी तरह अन्य राज्यों में भी योगी के चुनाव प्रचार का मतदाताओं पर काफी सकारात्मक असर पड़ रहा है। कर्नाटक में भी काफी संख्या में मुस्लिम मतदाता हैं, जिनका लगभग 40 सीटों पर अच्छा प्रभाव है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आज अपनी घोषणा पत्र जारी कर कर्नाटक की जनता के लिए कई लोकलुभावन वादे किए हैं। भाजपा ने अपनी घोषणा-पत्र का नाम प्रज्ञा ध्वनि दिया है। भाजपा गरीब, किसान एवं दलित वर्गों पर विशेष ध्यान रखते हुए बीपीएल राशन कार्ड होल्डरों को साल में तीन मुफ्त एलपीजी सिङ्क्षलडर देने का वायदा किया है। इसके अलावा प्रत्येक वार्ड में अटल आहार केंद्र खोलने का वायदा किया है जहां गरीब लोग कम कीमत पर भोजन कर सकेंगे। इसके अलावा बीपीएल कार्ड धारकों को रोजाना आधा लीटर नंदिनी दूध उपलब्ध करवाया जाएगा। दलित महिलाओं को 10 हजार की एफडी करवाई जाएगी। गरीब लोगों को हर महीने प्रति व्यक्ति पांच किलो राशन मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा ने कर्नाटक में समान नागरिक संहिता लाने तथा असम की तरह एनआरसी करवाने का भी वादा किया है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच करवाने को भी घोषणा-पत्र में शामिल किया गया है। भाजपा के चाणक्य अमित शाह पूरी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। भाजपा हर हालत में कर्नाटक का चुनाव जीतना चाहती है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को साधने का भरसक प्रयास किया गया है। कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सहित कई नेता भी चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। राहुल गांधी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा है कि पिछली बार भाजपा ने खरीददारी कर तथा लोकतंत्र को नष्ट कर सत्ता में आई। कांग्रेस कर्नाटक सरकार की नाकामियों को उजागर करने में लगी हुई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी कर्नाटक सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि सरकार अपने वादे को पूरा करने में विफल रही है।
कांग्रेस तथा जनता दल (एस) हर हालत में भाजपा को पटखनी देने की कोशिश में है। कर्नाटक में चल रहा चुनावी महाभारत देश-विदेश के पर्यवेक्षकों का ध्यान आकॢषत कर रहा है। दक्षिण भारत में भाजपा का गढ़ कर्नाटक मोदी, शाह एवं योगी के करिश्मा पर टिकी हुई है। अगर कर्नाटक में भाजपा की हार हुई तो इसका असर देश की राजनीति पर पडऩा स्वाभाविक है। इससे विपक्षियों के हौसले बढ़ेंगे। यही कारण है कि भाजपा कर्नाटक में जीत दर्ज कर 2024 का रास्ता आसान करना चाहती है।