वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आखा तीज अर्थात अक्षय तृतीया कहा जाता हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उनका अक्षय फल प्रदान होता हैं। अक्षय तृतीया का मुहूर्त मांगलिक कार्यों एव नवीन क्रय , दान पुण्य, जप तप स्नान, के लिए स्वयं सिद्ध अबूझ माना गया हैं। अक्षय का तात्पर्य जिसका कभी क्षय ना हो।
देव गुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन : अक्षय तृतीया 22 अप्रैल 2023 को देवताओं के गुरु देव गुरु बृहस्पति का मंगल देव की स्वग्रही मेष राशि मे सुबह 5 बजकर 14 मिनट पर मंगलमय प्रवेश होगा, इस गोचर के दौरान देव गुरु बृहस्पति 4 सितंबर को शाम 7 बजकर 40 मिनट पर वक्री होंगे तथा 31 दिसंबर सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर मार्गी होंगे।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देव गुरु बृहस्पति के मेष राशि में प्रवेश का सभी 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभावः-
मेष : कार्यों में जल्दबाजी करने से बचे, भाग्योदय, तनाव में कमी, धार्मिक यात्राएं होगी।
वृषभ : घर मे मांगलिक कार्य उत्सव के योग बनेंगे। नवीन वाहन भूमि क्रय के योग।
मिथुन : सम्मान की प्राप्ति एवम संतान योग, उच्च शिक्षा के अवसर प्राप्त होंगे।
कर्क : कार्य क्षेत्र में परिवर्तन के योग, पैतृक सम्पति से लाभ धन लाभ।
सिंह : स्वास्थ्य लाभ एवम पराक्रम में वृद्धि छोटी यात्राएं।
कन्या : अपयश मानसिक तनाव, जीवन साथी के स्वास्थ्य की चिंता, आकस्मिक धन लाभ के योग तथा विदेश यात्रा के योग बनेंगे। तुला : साझेदारी व्यापार में वैचारिक टकराव , विवाह योग।
वृश्चिक : मांगलिक कार्यों में खर्च, नोकरी पेशा वर्ग के लिए स्थान्तरण के योग, लंबी यात्रा के योग।
धनु : संतान योग, मान प्रतिष्ठा में वृद्धि , भाग्योदय, धार्मिक यात्राएं।
मकर : नवीन गृह निर्माण योग, भूमि वाहन नवीन वस्त्र आभूषण से लाभ।
कुम्भ : राजनीतिक लाभ, परिणय चर्चा, भाग्य में वृद्धि।
मीनः वाणी पर नियंत्रण, कुटुंब परिवार से सहयोग बना कर रखे। ज्ञान एवं धन के कारक देव गुरु बृहस्पति का अग्नि तत्व राशि मेष में गोचर चंद्र कुंडली के आधार पर बाकी फलादेश आपकी कुंडली मे देव गुरु बृहस्पति के स्थिति पर सकारात्मक एवम नकारात्मक फल प्रदान करेगा।
गुवाहाटी
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