आतंक के पर्याय अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मीडिया और पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी गई। भारत के इतिहास में ऐसे हत्याकांड के उदाहरण बहुत ही कम मिलते हैं। अतीक अहमद एक दुर्दांत अपराधी सह राजनेता था, जिसकी जड़ें काफी गहरी थीं,उसके खिलाफ सौ से अधिक मामले चल रहे थे, जिसमें हत्या, अपहरण और फिरौती जैसे मामले शामिल हैं। ऐसे अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिले,ऐसा अधिकांश लोग चाहते हैं, परंतु यह सब-कुछ कानून के तहत होना चाहिए था, परंतु अतीक, अशरफ और असद के साथ जो भी घटनाएं घटीं, वे अप्रत्याशित थीं। हमारे देश में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, सरकार को इसकी व्यवस्था करनी चाहिए, परंतु इस पूरे प्रकरण में योगी सरकार की जो भूमिका रही है, वह कम संदेहास्पद और विवादास्पद नहीं है।
अतीक अहमद का जन्म 12 अगस्त 1962 में हुआ था। वह समाजवादी पार्टी से सांसद और उत्तर प्रदेश विधानसभा का सदस्य भी रह चुका है। बीते कल यानी 15 अप्रैल 2023 को जांच के लिए अस्पताल ले जाते समय पुलिस सुरक्षा के बावजूद उसकी व उसके भाई अशरफ की गोली मार कर हत्या कर दी गई। अतीक का विवाह शाइस्ता परवीन से हुआ था। उसके पांच बेटे थे, जिनके नाम अली, उमर, अहमद, असद, अहजान और अबान है। असद का पुलिस एनकाउंटर में मौत हो चुकी है। अतीक इलाहाबाद पश्चिम सीट से लगातार 5 बार विधानसभा का सदस्य रह चुका है। 2004-2009 से वह उत्तर प्रदेश के फूलपुर से 14वीं लोकसभा के लिए समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता था।
1999-2003 के बीच वह सोनेलाल पटेल द्वारा स्थापित अपना दल का अध्यक्ष था। अतीक अहमद विभिन्न आरोपों में बंद रहते हुए जेल से कई चुनाव लड़ा था। 15 दिसंबर 2016 को सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी और विज्ञान विश्वविद्यालय के कर्मचारियों पर हमला करने के लिए अतीक को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद 2019 में फिर से गिरफ्तार होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। उमेश पाल मर्डर में उसका नाम जोड़ा जा रहा था और गुजरात की साबरमती जेल में बंद अतीक को सुनवाई के लिए प्रयागराज लाया गया था। 13 अप्रैल 2023 को पेशी के लिए आए अतीक अहमद को झांसी में उसके पुत्र असद के एनकाउंटर की खबर मिली। अतीक पर संगीन धाराओं में 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। वह जेल के अंदर से ही अपनी आपराधिक गतिविधियों को संभाला करता था। उस पर आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैय्यबा, आईएसआई और अंडरवर्ल्ड से संबंध होने के भी आरोप लगे।
15 अप्रैल, 2023 को इलाहाबाद में अतीक को अदालत की ओर से अनिवार्य चिकित्सा जांच के लिए ले जाते समय अहमद से उसके बेटे के अंतिम संस्कार के दौरान उसकी अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया, जिसका उसने जवाब दिया, नहीं ले गए तो नहीं गए। जैसे ही उसका भाई अशरफ अपने जवाब में गुड्डू मुस्लिम का जिक्र करने वाला था, अहमद के सिर पर पिस्तौल से गोली मार दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई। गोलीबारी में अतीक और अशरफ दोनों मारे गए, जो कैमरे में कैद हो गए और टेलीविजन पर इसका सीधा प्रसारण किया गया। बाद में पता चला कि शूटर मीडियाकर्मी का रूप धारण किए हुए थे और हत्या करने के बाद भागने का प्रयास नहीं किया। पकड़े जाने पर वे जयश्री राम के नारे लगाए।
गौरतलब है कि गोलीबारी के वक्त अतीक पुलिस कर्मियों से घिरा हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों शूटरों की पहचान लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी के रूप में हुई है। शूटरों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की पूछताछ की जाएगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अतीक अहमद और अशरफ अहमद भले ही अपराधी थे, परंतु उनकी मौत ने आज की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रखी दी है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि इसी तरह का टेरर जारी रहा, उसमें संविधान, कानून और अदालत की कोई भूमिका रह गई है क्या?