इन दिनों भारत बढ़ती जनसंख्या की मार झेल रहा है। कुछ लोग आमतौर पर सवाल पूछते हैं कि भारत कब दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बनेगा। इस मामले में अलग-अलग अनुमान है। कुछ लोगों का मानना है कि भारत पहले ही चीन से आगे निकल चुका है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा जुलाई में होगा। उलझनें इसलिए ज्यादा हैं क्योंकि यह आंकड़ा अनुमान पर ही आधारित है। 1950 के दशक में चीन दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बना था। अब उसकी आबादी 1.4 अरब से ज्यादा है, लेकिन भारत भी 1.4 अरब के आंकड़े को पार कर चुका है। दोनों देशों में कुल मिलाकर पूरी दुनिया के एक-तिहाई से ज्यादा लोग रहते हैं। दुनिया की आबादी 8 अरब को पार कर चुकी है। ऐसा कोई तरीका नहीं है, जिससे सटीक वक्त का पता लगाया जा सके कि भारत कब चीन से आगे निकलेगा। भारत ही नहीं, चीन की आबादी के मामले में भी अनिश्चितता की स्थिति है।
आबादी का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ गणितीय गणनाओं और सर्वेक्षणों के साथ-साथ जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड पर निर्भर हैं, इन्हीं के आधार पर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अप्रैल के मध्य में किसी वक्त भारत की आबादी चीन से ज्यादा हो जाएगी, लेकिन वे चेताते हैं कि इसे पुख्ता जानकारी नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि आंकड़े धुंधले होते हैं और बदल सकते हैं। यह एक मोटा-मोटा अंदाजा है। कुछ साल पहले तक भारत की आबादी के मामले में चीन से आगे निकलने की कोई संभावना नहीं थी, लेकिन चीन की जन्म दर में भारी कमी ने परिस्थितियों को बदल दिया। चीन इस वक्त आबादी घटने की समस्या से गुजर रहा है और इसे ठीक करने के लिए उसने अपनी नीतियों में बड़े बदलाव किए हैं। मसलन, लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
पिछली बार भारत और चीन की आबादी के आंकड़े जुलाई 2022 में जोड़े गए। आंकड़े जमा करने के बाद विशेषज्ञ सांख्यिकीय तकनीकों का इस्तेमाल कर यह अनुमान लगा रहे हैं कि कब भारत की आबादी चीन से ज्यादा हो जाएगी। सच्चाई यही है कि ये आंकड़े बस अनुमान ही हंै, लेकिन कम से कम इतना जरूर है कि ये अनुमान ठोस तकनीक पर आधारित हैं। दोनों देशों की आबादी से जुड़े आंकड़ों का सबसे पुख्ता स्रोत तो जनगणना ही है, जो कि हर दस साल में एक बार की जाती है। चीन में पिछली जनगणना 2020 में हुई थी। विशेषज्ञ जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाते हैं कि तब से देश की जनसंख्या में कितने लोग जुड़ चुके हैं। 2021 में होने वाली जनगणना को कोविड के कारण टाल दिया गया।
घर-घर जाकर जुटाए जाने वाले आंकड़ों की अनुपस्थिति में जनसंख्याविदों के पास बीच-बीच में हुए सर्वेक्षण ही उपलब्ध हैं, जो जनसंख्या के अनुमान का आधार है। इन सर्वेक्षणों में सबसे प्रमुख सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम है जो जन्म, मृत्यु, जन्म दर आदि पर सर्वेक्षण करता है। एजेंसी को इन आंकड़ों पर भरोसा है क्योंकि ये बेहद ठोस तकनीक से जुटाए जाते हैं। चीन की आबादी लगातार बूढ़ी हो रही है। सात साल पहले देश ने एक परिवार एक बच्चा नीति को खत्म कर दिया था। दो साल पहले कहा गया कि एक परिवार में तीन बच्चे तक हो सकते है। उसके बावजूद देश की जनसंख्या स्थिर बनी हुई है। उसके मुकाबले भारत की आबादी युवा है। यहां की जन्म दर ऊंची है और पिछले तीन दशकों में शिशु मृत्यु दर में भारी कमी आई है। इस वक्त भारत में वार्षिक तौर पर दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं, जबकि चीन का हाल यूरोपीय देशों जैसा हो चुका है।