धर्म शास्त्रों में सात चिरंजीवियों का जिक्र किया गया है। ये सात चिरंजीवी अश्वत्थामा, बलि, महर्षि वेदव्यास, हनुमान जी, विभीषण, कृृपाचार्य और भगवान परशुराम हैं। ये अमर आत्माएं हैं, जो आज भी पृथ्वी पर हमारे बीच मौजूद हैं। कलयुग में इन सात चिरंजीवियों में भगवान हनुमान की आराधना सबसे अधिक की जाती है। मान्यता है कि मारुति नंदन का नाम मात्र लेने से ही बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं और बड़ी से बड़ी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं। हनुमान जी का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा को हुआ था। इस साल ये तिथि 06 अप्रैल को है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने पवन पुत्र हनुमान के रूप में 11वां रुद्रावतार लिया था। इस दिन भगवान हनुमान की विधि-विधान से पूजा की जाती है, लेकिन हनुमान जी पूजा को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। चलिए जानते हैं हनुमान जी की पूजा के नियम।
बूंदी का लगाएं भोग : बजरंगबली को बूंदी के लड्डू अतिप्रिय हैं। ऐसे में हनुमान जी की पूजा में लड्डू जरूर शामिल करें। लेकिन ध्यान रहे कि हनुमान जी की उपासना में चरणामृत का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
ब्रह्मचर्य का पालन : महाबली हनुमान अखण्ड ब्रह्मचारी और महायोगी हैं, इसलिए इनकी पूजा में वस्त्र से लेकर विचारों तक में पवित्रता बना कर रखें। ब्रह्मचर्य व इंद्रिय संयम को अपनाएं। हनुमान जी की उपासना करते समय किसी भी प्रकार की कामुक चर्चा नहीं करनी चाहिए।
मांस-मदिरा के सेवन बचें : हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली की पूजा को सफल बनाने के लिए किसी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन भूल से भी मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।