प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के भ्रष्टाचारियों पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि ये शक्तियां लोकतंत्र और न्याय की राह में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के प्रति कृृतसंकल्प है। सरकार के पास इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति मौजूद है। देश की जनता भी चाहती है कि भ्रष्टाचारियों को कड़ी सजा मिले ताकि देश का तेजी से विकास हो सके। भ्रष्टाचार कोई सामान्य अपराध नहीं है। भ्रष्टाचार से गरीबों का हक छीनता है तथा उससे अन्य कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। मोदी सरकार ने काले धन और बेनामी संपत्ति के खिलाफ अभियान शुरू किया है। प्रधानमंत्री ने इसके लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को काम करने के लिए खुली छूट देते हुए कहा है कि सरकार आपके पीछे मजबूती से खड़ी है।

सीबीआई के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश की जनता सीबीआई पर विश्वास करती है। जब कोई केस जटिल हो जाता है तो उसकी जांच के लिए लोगों द्वारा सीबीआई जांच की मांग होने लगती है। मोदी ने इशारे इशारे में कहा कि भ्रष्टाचार से भाई-भतीजावाद और परिवारवाद को प्रोत्साहन मिलता है। भ्रष्टाचारियों ने देश का खजाना लूटकर अपनी झोली भरी तथा जनता को कंगाल बनाया। जैसे-जैसे भारत की आर्थिक शक्ति बढ़ रही है वैसे-वैसे भारत पर हमले बढ़ रहे हैं। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के द्वारा 1 अप्रैल 1963 को सीबीआई की स्थापना हुई थी। सीबीआई के बारे में प्रधानमंत्री के वर्तमान बयान में काफी कुछ छिपा हुआ है। देश की विपक्षी पार्टियां सीबीआई और ईडी के खिलाफ एक व्यापक अभियान छेड़ रखा है।

विपक्षी पार्टियों का मानना है कि सीबीआई और ईडी केंद्र सरकार की कठपुतली बन गई है तथा उसके इशारे पर नाच रही है। कांग्रेस सहित आठ विपक्षी दलों ने इसके बारे में प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा है। सीबीआई और ईडी का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 विपक्षी दलों की याचिका खारिज भी कर दी है। इससे सरकार की स्थिति मजबूत हुई है। विपक्ष का कहना है कि सीबीआई और ईडी केवल विपक्षी दल के नेताओं को ही निशाने पर ले रही है। इन दोनों केंद्रीय एजेंसियों की जद में 90 प्रतिशत से ज्यादा विपक्षी नेता हैं। विपक्षी नेता इन दोनों एजेंसियों की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा रहे हैं। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं के बयान को ही ध्यान में रखकर सीबीआई को काम करने के लिए पूरी छूट दे दी है। वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे विपक्षी दल भी सक्रिय होने लगे हैं। कुछ विदेशी शक्तियां भी भारतीय चुनाव को प्रभावित करने के लिए साजिश रचने में जुट गई हैं।

खालिस्तान को लेकर ब्रिटेन, अमरीका, कनाडा एवं आस्ट्रेलिया में हुए भारत विरोधी प्रदर्शन इसका जीता-जागता उदाहरण है। जैसे-जैसे भारत विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है, कुछ शक्यिां इसमें बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं। सरकार का मानना है कि इन कोशिशों के पीछे भ्रष्टाचारियों की धन शक्ति भी काम कर रही है। देश में भ्रष्टाचार की घटना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसकी बढ़ती प्रवृत्ति खतरनाक है। भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। देश के विकास के लिए भ्रष्टाचारियों को कानून के दायरे में लाना जरूरी है। लेकिन राजनीतिक हित के लिए सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। जांच एजेंसियों के काम-काज में पारदर्शिता जरूरी है। कुछ राजनीतिक दलों द्वारा भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए जो पहल हो रही है, उस पर भी अंकुश लगना चाहिए। राष्ट्रहित में सभी संबद्ध पक्षों को सकारात्मक सोच के साथ काम करना होगा।