बृहस्पतिवार को चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन है। इसी के साथ नवरात्रि का समापन हो जाता है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं और सिंह पर सवार होती है। उनके दाहिने नीचे वाले हाथ में चक्र,ऊपर वाले हाथ में गदा और बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प है। माता की पूजा से सारे मनोरथ सिद्ध होते हैं। साथ ही यश, बल, कीर्ति और धन की प्राप्ति होती है। चैत्र नवमी तिथि 29 मार्च को रात 9.07 बजे से शुरू होगी और 30 को रात 11.30 बजे तक रहेगी।

उदया तिथि के हिसाब से महानवमी का पर्व 30 मार्च को मनाया जाएगा। इस  दिन राम नवमी भी मनायी जाती है, इसलिए मां सिद्धिदात्री के साथ श्रीराम का भी पूजन किया जाएगा। मां सिद्धिदात्री और प्रभु श्रीराम के पूजन और हवन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5.25 से 6.54 बजे तक, इसके बाद 8.37 बजे से दोपहर 12.48 बजे तक रहेगा। इसके अलावा 3.06 बजे से शाम 5.22 बजे तक रहेगा। इस बार 4 विशेष योग बनने से महानवमी और भी खास हो गई है। इस बार चैत्र महानवमी पर गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। ये सभी योग अत्यंत मंगलकारी माने गए हैं। इसमें सर्वार्थ सिद्धि योग तो पूरे दिन रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग में किया गया कोई भी काम सफल होता है।

अगर आप किसी विशेष काम के लिए नई शुरुआत करना चाहते हैं तो इस दिन से कर सकते हैं। महानवमी के मौके पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए रोजान की तरह सबसे पहले कलश की पूजा करें। इसके बाद मातारानी को रोली, कुमकुम, पुष्प, चुनरी, अक्षत, भोग, धूप-दीप आदि अर्पित करें. इसके बाद घर में माता के मंत्रों का जाप करते हुए हवन करें। मां को भोग लगाएं। पूजन के बाद कन्या पूजन करे। कन्या पूजन में 2 वर्ष से 9 वर्ष तक की 9 कन्याओं व एक बालक को बैठाएं। उनके चरण धुलवाएं, विधिवत उन्हें भोजन कराएं, तिलक लगाएं, आरती उतारें, दक्षिणा दें और चरण छूकर आशीष लें. इसके बाद व्रत का पारण करें।