क्रिएटिव लोगों के बारे में कहा जाता है कि वे पुरानी चीजों को बहुत जल्दी भूल जाते हैं। विद्वानों का भी कहना है कि भूल जाने वाले लोगों में महत्वहीन चीजों को महत्वपूर्ण चीजों से अलग करने की विशेष क्षमता होती है। ऐसे लोग ही बाकी से हटकर सोच पाते हैं। आइए समझते हैं कि विज्ञान के मुताबिक लोग चीजों या पुरानी यादों को क्यों भूल जाते हैं? हम में से कई लोगों के साथ ऐसा हुआ होगा कि घर से सामान लेने के लिए निकले हों और कुछ चीजें लाना भूल ही गए हों। कई बार ऐसा भी होता है कि हम अपने हाथ में बंधी हुई घड़ी या सिर पर लगे हुए चश्मे को ही पूरे घर में खोजते रहते हैं। कई बार बाजार में शॉपिंग करते समय अपना चश्मा या वॉलेट काउंटर पर ही छोड़ आते हैं।

यादाश्त पर शोध करने वाले लोग भूलने को याद करने के उलट प्रक्रिया मानते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के जीवन में लगातार और तेजी से बदलाव हो रहे हैं तो बाकी लोगों के मुकाबले लोगों, घटनाओं और चीजों भूलेगा भी तेजी से। असल में यह यादाश्त की कमजोरी से कहीं ज्यादा उसके जीवन का अभिन्न अंग बन जाता है। दरअसल, हम जो कुछ भी याद करते हैं, अनुभव करते हैं या भविष्य की योजना बनाते हैं, वह न केवल हमारी मौजूदा यादों पर निर्भर करता है, बल्कि उन सभी बातों पर भी निर्भर करता है, जिन्हें हम अब नहीं जानते हैं। यह स्थिति एक संगमरमर की मूर्तिकला जैसी है, जो एक मूर्तिकार ने चट्टानों से अभी-अभी तराशकर बनाई है। वह मूर्ति बनाने के दौरान पत्थर के वास्तविक आकार को भूलता जाता है।

दरअसल, हमारे जीवन में लगातार बदलाव होते रहते हैं। इसलिए हमारा दिमाग गैर-जरूरी चीजों, घटनाओं और यादों को स्मृति से हटाता जाता है। बदलती परिस्थितियों के अनुकूल होने के लिए हमें नई चीजें सीखनी चाहिए। इसी तरह नई चीजों को सीखने के लिए पिछली सीखी हुई उन चीजों को भूलना भी जरूरी है, जो आज के काम के लिए उपयोगी नहीं है। इसीलिए हमारा सिस्टम बिना उपयोग की यादों को स्मृति से मिटाता रहता है।