नवरात्र दो शब्दों से मिलकर बना है नव और रात्रि यानी की 9 रातें। ‘रात्रि’ शब्द सिद्धि का प्रतीक है। प्राचीन काल में शक्ति और शिव की अराधना के लिए ऋषि मुनियों ने दिन की अपेक्षा रात्रि को ज्यादा महत्व दिया है। पुराणों के अनुसार रात में कई तरह के अवरोध खत्म होते हैं। माना जाता है कि रात्रि का समय शांत रहता है, इसमें ईश्वर से संपर्क साधना दिन की बजाय ज्यादा प्रभावशाली होता है। इन 9 रातों में देवी के 9 स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्रि के 9 दिन साधना कर अपनी आध्यात्मिक शक्ति जगाने के लिए होते हैं।
इन 9 दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन सिर्फ तन से ही नहीं बल्कि मन से भी करना चाहिए। किसी भी तरह का कामुक विचार मन में न लाएं और महिलाओं से दूरी बनाकर रहें। नवरात्रि में भूलकर भी किसी महिला का अपमान न करें। इस नवरात्रि मां दुर्गा की पूजा के लिए चंदन, कलावा, कुमकुम, हल्दी, जल युक्त नारियल, गुलाल, अबीर, अक्षत, मेहंदी, इत्र, कपूर, अखंड ज्योति के लिए - दीप, घी, तेल, मौली, रूई, हवन कुंड, हवन के लिए आम की समधिया (लकी), फल, मिठाई, पंचमेवा, लाल फूल, दीपक का उपयोग करें. चैत्र नवरात्रि उत्सव देवी अंबा (विद्युत) का प्रतिनिधित्व है। वसंत की शुरुआत और शरद ऋतु की शुरुआत को जलवायु और सूरज के प्रभावों के हिसाब से महत्वपूर्ण माना जाता है। और इसे मां दुर्गा की पूजा के लिए पवित्र अवसर माना जाता है।
त्योहार की तिथियां चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित होती हैं। नवरात्रि पर्व, मां-दुर्गा की अवधारणा भक्ति और परमात्मा की शक्ति (उदात्त, परम, परम रचनात्मक ऊर्जा) की पूजा का सबसे शुभ और अनोखा अवधि माना जाता है। यह पूजा वैदिक युग से पहले, प्रागैतिहासिक काल से होती आ रही है। नवरात्रि में नौ दिनों तक दाढ़ी-मूंछ बनवाना, बाल या नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए नवरात्रि शुरू होने से पहले ही ये सारे जरूरी कार्य निपटा लेने चाहिए और तामसिक भोजन हटाकर नवरात्रि के दिन सात्विकता का पालन करना चाहिए।