होली का रंगारंग पावन पर्व प्रत्येक वर्ष चांद्रमास के अनुसार फाल्गुन शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन हर्ष, उमंग व उल्लास के साथ मनाने की मान्यता है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन बताया कि इस बार पूर्णिमा तिथि 6 मार्च, सोमवार को दिन में 4 बजकर 18 मिनट पर लगेगी, जो कि 7 मार्च, मंगलवार को सायं 6 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। 6 मार्च, सोमवार को भद्रा सायं 4 बजकर 18 मिनट से अर्द्धरात्रि के पश्चात् 5 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। भद्रा होने से होलिकादहन करने की मान्यता नहीं है, लेकिन भद्रपुच्छ में होलिकादहन करने की धार्मिक मान्यता है।
इस बार 6 मार्च, सोमवार को भद्रा पुच्छ में रात्रि 12 बजकर 53 मिनट से भद्रपुच्छ का समय प्रारंभ हो जाएगा, जिसमें शुभ मुहूर्त में होलिकादहन करना मंगलकारी रहेगा। स्नान-दान-व्रतादि का पर्व फाल्गुनी पूर्णिमा 7 मार्च, मंगलवार को मनाया जाएगा। फाल्गुन शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि को ही श्री चैतन्य महाप्रभु की जयंती भी मनाई जाती है।
होलाष्टक : फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि से फाल्गुन शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि तक होलाष्टक रहता है। होली से पूर्व 8 दिनों का समय होलाष्टक के नाम से जाना जाता है। अष्टमी तिथि को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को वृहस्पति, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा तिथि के दिन राहुग्रह उग्र स्वरूप में माने गए हैं। जिसके फलस्वरूप इन 8 दिनों में कोई भी मांगलिक कृत्य नहीं किए जाते। 27 फरवरी, सोमवार से प्रारंभ हुआ होलाष्टक 7 मार्च, मंगलवार को समाप्त हो जाएगा। 7 मार्च, मंगलवार को रंगोत्सव का रंगारंग पर्व विधि-विधानपूर्वक मनाया जाएगा।
इसी दिन एक-दूसरे को लोग अबीर-गुलाल भी लगाएंगे। काशी में चौसट्टी घाट पर विराजमान भगवती चौसट्टी देवी का दर्शन करने का विधान है। चैत्र कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि 7 मार्च, मंगलवार को सायं 6 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ हो जाएगी जो कि 8 मार्च, बुधवार को सायं 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगी।