अमरीकी एजेंसी हिंडनबर्ग की रिसर्च रिपोर्ट के बाद अडाणी कंपनी के शेयरों में काफी गिरावट आ गई थी। इसका नतीजा यह हुआ कि विश्व के अग्रणी उद्योगपति गौतम अडाणी की पूंजी में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद अडाणी प्रकरण को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अडाणी का नाम जोड़कर मामले को लेकर राजनीतिक रंग देना शुरू कर चुके  हैं। संसद से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन जारी है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपने संबोधन में अडाणी मामले पर कोई सीधा वक्तव्य न देकर केवल कांग्रेस पर सीधा हमला किया।

लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने 15 फरवरी को पहली बार अडाणी मामले पर बयान देकर कहा है कि इसमें भाजपा के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। यह मामला  सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सरकार को इस मामले की जांच से कोई आपत्ति नहीं है। जांच के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि इसके पीछे किस तरह की साजिश हुई थी। अमरीकी एजेंसी ने अडाणी समूह पर शेयरों की हेराफेरी एवं अकाउंट जालसाजी का आरोप लगाया था। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अब तक अडाणी ग्रुप की संपत्ति में काफी गिरावट आई है। निवेशकों का भी काफी नुकसान हो चुका है। सेबी भी इस मामले की जांच कर रही है।

अडाणी ग्रुप ने बढ़ती चुनौती का मुकाबला करने लिए ऑडिट के लिए लेखाकार फॉर्म ग्रांट थॉर्नटन को नियुक्त किया है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि वह उधार लिए गए शेयरों की शॉर्ट सेलिंग या बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है। कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़ने को तैयार नहीं है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को ज्यादा अमीर बनाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का इस्तेमाल कर रही है। रमेश ने कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में अडाणी समूह का एकाधिकार स्थापित करवाने में लगी है। दूसरे विपक्षी दल भी सरकार को घेरने का अवसर नहीं छोड़ रहे हैं।

नौ राज्यों में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव तथा अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी पार्टियां अडाणी मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है। इसीलिए वह इसे जीवंत रखना चाहती है, ताकि आगामी चुनावों में इसका लाभ मिल सके। अगर वास्तव में अडाणी ग्रुप की कंपनियों ने कोई हेराफेरी की है तो उसकी जांच होनी चाहिए तथा उस पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। अगर साजिश के तहत यह मामला उठाया गया है तो उसका पर्दाफाश भी होना चाहिए। हर हालत में निवेशकों की पूंजी की रक्षा होनी चाहिए। यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।