देश के प्रमुख उद्योगपति गौतम अडाणी के प्रधानमंत्री से संबंध के मुद्दे पर संसद के भीतर तथा बाहर घमासान मचा हुआ है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडाणी के शेयरों में आई गिरावट के बाद कांग्रेस तथा दूसरे विपक्षी दलों के नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लगातार हमलावर हंै। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा के बाद प्रधानमंत्री पर अनेक तीखे आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री की कृृपा से ही अडाणी को सरकारी बैंकों से हजारों करोड़ रुपए कर्ज के रूप में मिले। देश के छह हवाई अड्डों के संचालन तथा विदेशों से ठेका अडाणी को मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले उद्योगपतियों में अडाणी का नंबर 609 था जो अब उछल कर नंबर दो तक पहुंच गया है। इस मुद्दे पर 8 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी चर्चा का जवाब देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला किया। अडाणी मुद्दे पर सीधा कुछ न बोलते हुए मोदी ने अपनी सरकार की कामयाबी तथा 2014 से पहले कांग्रेस की नाकामी को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 तक देश की अर्थ व्यवस्था की बदतर हालत थी।

उन्होंने इस अवधि को घोटालों का दशक बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के कारण भारत की साख दुनिया में प्रभावित हुई थी। कश्मीर से कन्याकुमारी तक हिंसा का माहौल था तथा लगातार आतंकी घटनाएं हो रही थी। देश का नागरिक अपने को असुरक्षित महसूस कर रहा था। विपक्षी सदस्यों के टोकाटोकी के बीच मोदी ने कहा कि उनकी सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है। देश के 11 करोड़ किसानों को तीन बार किसान सम्मान राशि, 9 करोड़ महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन, 11 करोड़ घरों में शौचालय तथा एक करोड़ लोगों को पक्का मकान उपलब्ध करवाए हैं।

महिला सशक्तिकरण के तहत महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। कोरोना काल में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भारत में चलाया गया तथा 150 देशों को भारत में निर्मित कोरोना के टीके उपलब्ध करवाए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश मेक इन इंडिया के तहत रक्षा तथा दूसरे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की ओर प्रयासरत है। इस वर्ष नौ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों तथा वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए विपक्ष मोदी सरकार को घेरने के लिए प्रयासरत है। कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दल आगामी लोकसभा चुनाव में अडाणी प्रकरण को एक बड़ा मुद्दा बनाना चाहते हैं। भाजपा कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल की नाकामियों को उजागर कर विपक्ष को बैकफुट पर धकेलने की मुहिम चला रही है। अगर अडाणी प्रकरण से सरकारी बैंकों को कोई नुकसान हुआ है तो इसकी निश्चित रूप से जांच होनी चाहिए। लेकिन अडाणी मामले को अनावश्यक रूप से उछालकर देश की छवि को नुकसान करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।