फिलहाल पड़ोसी देश पाकिस्तान बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट से गुजर रहा है, वहां महंगाई बेतहाशा बढ़ रही है। खाना-पीने सहित दैनिक उपयोग में आने वाली खाद्य सामग्री की कीमत इतनी बढ़ गई है कि वे सब आम लोगों के वश से बाहर हो गई हैं। इसी बीच डालर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपए में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।
बीते दो-तीन दिनों से डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपए का मूल्य काफी तेजी से गिरा है। बीते शुक्रवार यानी 27 जनवरी को यह गिरकर 265 रुपए तक पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी रुपया का मूल्य 26 जनवरी को 9.6 प्रतिशत गिर गया था। यह पाकिस्तानी रुपए के इतिहास में एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट थी। ऐसा तब हुआ जब विदेशी मुद्रा कंपनियों ने विनिमय दर पर से सीमा हटा दिया। ऐसा करने का उद्देश्य था रुपए के मूल्य को बाजार की ओर से निर्धारित मूल्य के पास ले जाना।
पाकिस्तान इस समय एक गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। संकट से उबरने के लिए उसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की मदद चाहिए और कोष मुद्रा के मूल्य पर से कृृत्रिम सीमाओं को हटाने का समर्थन करता है। सीमा के हटाए जाने से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार मिलती-जुलती स्थिति में आ गए हैं। विनिमय कंपनियों को उम्मीद है कि इससे डॉलर का काला बाजार धीरे-धीरे बंद हो जाएगा,लेकिन इससे आम लोगों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। लोग पहले से आयातित ईंधन और खाने पीने की चीजों के बढ़े हुए दामों के बोझ से परेशान हैं। पाकिस्तान के पास सिर्फ 3.68 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा बची है जिससे मुश्किल से तीन और हफ्तों तक आयात का भुगतान करना संभव हो पाएगा। इस समय पाकिस्तान को आईएमएफ की सख्त जरूरत है। इस्लामाबाद चाहता है कि कोष देश को दिवालिया होने से बचा ले और अपने बचाव कार्यक्रम की एक अरब डॉलर की अगली किस्त जल्दी जारी करे। 2019 में कोष की तरफ से छह अरब डॉलर के राहत पैकेज पर सहमति हुई थी।
पिछले साल की विनाशकारी बाढ़ के बाद इस पैकेज को बढ़ाकर सात अरब डॉलर का कर दिया गया था, लेकिन नवंबर में सरकार के राजकोषीय घाटे को कम करने की असफलता की वजह से इस मदद की किस्तों को जारी करना रोक दिया था। कोष चाहता है कि सरकार और भी मजबूत राजस्व संबंधी कदम उठाए। एक बार आईएमएफ पैकेज की किस्तें जारी करना फिर से शुरू कर देगा तो उम्मीद है कि दूसरी संस्थाएं भी पाकिस्तान को मदद देना शुरू कर देंगी। कोष ने घोषणा की है कि उसका प्रतिनिधि मंडल पैकेज पर चर्चा करने के लिए 31 जनवरी से नौ फरवरी तक पाकिस्तान की यात्रा करेगा। इस घोषण से सरकार में मदद राशि के मिलने की उम्मीद जग गई है।
जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान कर्ज लौटाने को लेकर चूक से बचने के लिए 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज में से 1.1 अरब डॉलर की महत्वपूर्ण किस्त प्राप्त करना चाहता है। राहत पैकेज जारी करने के लिए पाकिस्तान आईएमएफ से बात कर रहा है। पाकिस्तानी रुपए में गिरावट इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान इस समय बहुत जरूरी कर्ज आईएमएफ से प्राप्त करने के बहुत करीब है। कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि उनकी सरकार पिछले कुछ महीनों से रुके 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज को बहाल कराने के लिए आईएमएफ की कठिन शर्तों को मानने को तैयार है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान का निर्यात भी काफी बुरे समय का सामना कर रहा है। दरअसल, पाकिस्तान में काम करने वाली विदेशी शिपिंग कंपनियां उसके लिए अपनी सेवाएं बंद करने पर विचार कर रही हैं। ऐसी स्थिति में देश के सभी एक्सपोर्ट ठप हो सकते हैं। कुल मिलाकर पाकिस्तान का आर्थिक संकट दिनों- दिन विकराल होते जा रहा है, जिस पर नियंत्रण करना आसान नहीं है।