जयपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने समाज के हर उपेक्षित एवं वंचित तबके को सशक्त करने का प्रयास किया है और वह वंचितों को वरीयता का मंत्र लेकर चल रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया के हर बड़े मंच पर अपनी बात डंके की चोट पर कहता है और दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। मोदी भीलवाड़ा जिले के मालासेरी में लोक देवता ‘भगवान श्री देवनारायण’ के अवतार महोत्सव समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बीते 8-9 वर्षों से देश समाज के हर उस वर्ग को सशक्त करने का प्रयास कर रहा है, जो उपेक्षित रहा है, वंचित रहा है। वंचितों को वरीयता के इस मंत्र को लेकर के हम चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आप याद करिए, राशन मिलेगा या नहीं, कितना मिलेगा, ये गरीब की कितनी बड़ी चिंता होती थी।

आज हर लाभार्थी को पूरा राशन मिल रहा है, मुफ्त मिल रहा है। अस्पताल में इलाज की चिंता को भी हमने आयुष्मान भारत योजना से दूर कर दिया है। गरीब के मन में घर, शौचालय, बिजली, गैस कनेक्शन को लेकर चिंता हुआ करती थी, वो भी हम दूर कर रहे हैं। बैंक से लेन-देन भी कभी बहुत ही कम लोगों के नसीब होती थी। आज देश में सभी के लिए बैंक के दरवाजे खुल गए हैं। इससे पहले मोदी ने ‘भगवान श्री देवनारायण’ के मंदिर में पूजा अर्चना की और यज्ञ में आहुति दी।  श्री देवनारायण की विशेष रूप से गुर्जर समाज में बड़ी मान्यता है। स्वतंत्रता संग्राम और अन्य आंदोलनों में गुर्जर समुदाय के लोगों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि ये देश का दुर्भाग्य है कि ऐसे अनगिनत सेनानियों को हमारे इतिहास में वो स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वो हकदार थे, जो उन्हें मिलना चाहिए था।’ 

उन्होंने कहा कि लेकिन आज का नया भारत बीते दशकों में हुई उन भूलों को भी सुधार रहा है। अब भारत की संस्कृति और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए, भारत के विकास में जिसका भी योगदान रहा है, उसे सामने लाया जा रहा है।  मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया के हर बड़े मंच पर अपनी बात डंके की चोट पर कहता है। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया के हर बड़े मंच पर अपनी बात डंके की चोट पर कहता है। आज भारत दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। इसलिए ऐसी हर बात, जो हम देशवासियों की एकता के खिलाफ है, उससे हमें दूर रहना है। हमें अपने संकल्पों को सिद्ध कर दुनिया की उम्मीदों पर खरा उतरना है।