गुवाहाटी : इस वर्ष के गणतंत्र दिवस की केंद्रीय परेड में असम के प्रतीक के रूप में महावीर लाचित बरफुकन को दिखाया गया। लाचित बरफुकन को सराईघाट के युद्ध में हाथ में हेंडांग लिए सामने से नेतृत्व करते हुए दिखाया गया। प्रतीक पट की पहली पंक्ति में लाचित बरफुकन के हाथ में हेंडांग लिए हुए एक विशाल मूर्ति दिखाई गई। इस मूर्ति के आकार और हेंडांग को लेकर काफी क्षोभ देखा गया है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि लाचित की प्रतिमा को विकृत किया गया है। उनके अनुसार लाचित की मूर्ति का अवयव किसी मंगोलियाई वीर का नहीं हो सकता।

26 जनवरी को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस की केंद्रीय परेड में लाचित बरफुकन को गलत तरीके   से पेश करने को लेकर कई व्यक्तियों ने अपना क्षोभ व्यक्त किया। मालूम हो कि प्रतीक के लिए निविदा पिछले साल सितंबर में असम सरकार के संस्कृति निदेशालय द्वारा आमंत्रित की गई थी। तदनुसार मुंबई स्थित फर्म क्यूडब्ल्यू एडस को लगभग 35 लाख रुपए में लोगो बनाने का ठेका दिया गया था। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत मंत्री बिमल बोरा और असमिया शोधकर्ताओं की अध्यक्षता में सांस्कृतिक विभाग के शीर्ष अधिकारियों द्वारा इस प्रतीक को डिजाइन किया गया था।

न केवल लाचित का चित्र, बल्कि लाचित बरफुकन द्वारा लिया गया हेंडांग भी अहोम का हथियार हेंडांग नहीं है। देश की जनता को गलत तरीके से लाचित का परिचय देकर असम को बदनाम करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार फर्मों के खिलाफ मुख्यमंत्री क्या कार्रवाई करेंगे यह तो समय ही बताएगा।