भारतीय नौसेना में कलवरी श्रेणी की पांचवीं पनडुब्बी आईएनएस वागीर को शामिल किया गया है। इस मौके पर नौसेनाध्यक्ष एडमिरल आर हरि कुमार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। इसका निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड में हुआ, जो पूरी तरह भारत में ही बनाया गया है। इस पनडुब्बी के शामिल होने से समुद्र में भारत की ताकत काफी बढ़ जाएगी। चीन और पाकिस्तान से मिल रही चुनौती को देखते हुए भारत को भी अपनी नौसेना को मजबूत करना होगा। हिंद महासागर में लगातार चीन की चुनौती बढ़ रही है। यह पनडुब्बी नौसेना और देश की सुरक्षा एवं अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इन्द्र कुमार गुजराल सरकार के वक्त प्रोजेक्ट-75 के तहत पनडुब्बियों को बनाने के लिए 30 साल की योजना बनाई गई थी। वर्ष 2005 में भारत और फ्रांस ने मिलकर छह स्कॉर्पीन क्लास की पनडुब्बियां बनाने के लिए 3.75 अरब डॉलर के समझौते पर दस्तखत किए। कलवरी क्लास की पहली पनडुब्बी कलवारी को 2017 में नौसेना में शामिल किया गया था। उसके बाद दूसरी पनडुब्बी खंडेरी, तीसरी करंज और चौथी वेला पहले ही लांच की जा चुकी है। वागीर की खासियत यह है कि ये दुश्मन की राडार में पकड़ में नहीं आएगी। वागीर का नाम सैंडफिश की एक प्रजाति पर रखा गया है, जो एक साइलेंट किलर है। हालांकि वागीर की 1 फरवरी 2022 में समुद्री ट्रायल शुरू की गई थी। इसकी खासियत एंटी सरफेस वार फेयर, एंटी सब-मरीन वारफेयर, खुफिया जानकारी जुटाना, माइन बिछाने और एरिया सर्विलांस करना है। 67 मीटर लंबी और 21 मीटर ऊंची वागीर पनडुब्बी को समुद्र के अंदर 350 मीटर की गहराई में तैनात किया जा सकता है। यह पानी के भीतर 40 कि.मी. प्रति घंटे तथा पानी के ऊपर 20 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। इस पनडुब्बी में 50 से ज्यादा सेलर और नौसेना के अधिकारी एक साथ ऑपरेशन कर सकते हैं। इसमें शामिल 16 टॉरपेडोस एवं माइंस मिसाइल इसको और घातक बनाती है। भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए नरेन्द्र मोदी सरकार अपनी सामरिक क्षमता को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। भारत अपनी सेना, नौसेना एवं वायु सेना को मजबूत करने के लिए कदम उठा रही है। डीआरडीओ ने हाल के कुछ महीनों में कई घातक मिसाइलों का परीक्षण किया है, जिसमें अग्नि-5, के-5 एवं प्रलय मिलाइल आदि शामिल हैं। एलएसी तथा समुद्री सीमा की निगरानी के लिए भारत कई विमानों एवं ड्रोनों की सेवा ले रहा है। नौसेना को मजबूत करने के लिए पहले ही दूसरे विमान वाहक पोत को समुद्र में उतारा जा चुका है। तीसरे विमान वाहक पोत के लिए भी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रक्षा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनने के लिए हथियारों एवं साजो-सामान के निर्माण क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना होगा।
भारत का नया सिकंदर
