सनातन धर्म में व्रत त्यौहार की परंपरा काफी पुरातन है। हिन्दू धर्मग्रंथों में हर माह के विशिष्ट तिथि की विशेष महत्ता है। हिन्दू धर्मग्रंथों में हर माह की एकादशी तिथि की विशेष महिमा है। प्रत्येक माह की एकादशी तिथि अलग-अलग नामों से जानी जाती है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि माघ मास के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि षट्तिला एकादशी के नाम से जानी जाती है। एकादशी तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। इस बार माघ कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि 17 जनवरी, मंगलवार को सायं 6 बजकर 06 मिनट पर लगेगी जो कि 18 जनवरी, बुधवार को सायं 4 बजकर 04 मिनट तक रहेगी। षट्तिला एकादशी तिथि के दिन भगवान श्रीविष्णु की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। षट्तिला एकादशी तिथि के दिन तिल का विशेष महत्व है। षट्तिला एकादशी व्रत के दिन छः प्रकार से तिल का प्रयोग किया जाता है।
1-तिल के जल से स्नान करें,
2-पिसे हुए तिल का उबटन करें,
3-तिलों से हवन करें,
4-तिल मिला हुआ जल पीएं,
5-तिलों का दान करें,
6-तिलों की मिठाई और व्यंजन बनाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, षट्तिला एकादशी के दिन तिल का दान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है और जो जितना तिल दान करता है, उतने हजार वर्ष तक स्वर्ग में स्थान पाता है। षट्तिला एकादशी पर तिल को पानी में डालकर स्नान करने और तिल का दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। आज के दिन संपूर्ण दिन व्रत-उपवास रखकर भगवान श्रीविष्णु की पूजा-अर्चना करके उनसे सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
ज्योतिर्विद् विमल जैन
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