लखनऊ/नई दिल्ली : मैनपुरी में उपचुनाव जीतने के बाद समाजवादी पार्टी के हौसले बुलंद हैं। अब अखिलेश यादव आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी को मजबूती देने में जुटे हुए हैं। अखिलेश यादव यादवलैंड की सीटों पर वापस से कब्जा जमाने की कोशिश में हैं, जो मौजूदा वक्त में बीजेपी के पास है। ये कहना ठीक होगा कि अब अखिलेश यादव अपने पिता के बनाए कुनबे को वापस से एक करने की कोशिश में जुट गए हैं। यूपी में 80 लोकसभा सीटों में करीब आधी दर्जन ऐसी सीटें थीं जहां यादव परिवार का कब्जा था। फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, इटावा, कन्नौज, बदायूं, आजमगढ़ जैसी लोकसभा सीटों को एक वक्त सपा की पुख्ता सीटें मानी जाती थी। मगर 2019 के लोकसभा चुनावों में अधिकांश सीट सपा के हाथ से जाती रहीं। कभी कन्नौज सीट से अपनी सियासी पारी शुरू करने वाले अखिलेश यादव परिवार की परंपरागत सीटों पर खास फोकस कर रहे हैं। कन्नौज सीट पर ही अखिलेश यादव के बाद उनकी पत्नी डिंपल यादव जीत दर्ज करती रहीं मगर बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सुब्रत पाठक को कन्नौज की सीट से उतार कर सपा-बसपा का समीकरण खराब कर दिया था। सुब्रत पाठक ने डिंपल यादव को 2019 के लोकसभा चुनाव में हराया था। मगर अब अखिलेश यादव कन्नौज सीट पर अपनी खास नजर रखने वाले हैं। अखिलेश यादव मैनपुरी उपचुनाव के प्रचार के दौरान यह संकेत दे चुके थे कि वह कन्नौज सीट से 2024 में चुनाव लड़ सकते हैं। कन्नौज के साथ मैनपुरी और इटावा की सीटों पर भी अखिलेश यादव की खास नजर है। वह हर हफ्ते इटावा और मैनपुरी के लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं। यूपी में अपनी खोई हुई जमीन तलाश करने में जुटे अखिलेश यादव यादव परिवार के पुराने साथियों की भी बांट जोह रहे हैं। अखिलेश यादव पहले शिवपाल यादव को वापस लाने के बाद यादवलैंड की सूरत को मुस्तैद करने के लिए काम कर रहे हैं। वहीं बीते लोकसभा चुनाव में रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय प्रताप यादव को फिरोजाबाद सीट से हार गए थे।