भारतीय सनातन परंपरा के हिंदू धर्मग्रंथों में हर माह के विशिष्ट तिथि की खास पहचान है। सनातन धर्म में व्रत त्यौहार की परंपरा काफी पुरातन है। मास व तिथि के संयोग होने पर ही पर्व मनाया जाता है। चांद्रमास के अनुसार प्रत्येक मास में दो बार एकादशी पड़ती है। सबकी अपनी अलग-अलग महिमा है। इस बार पौष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाई जाएगी। इस तिथि के दिन भगवान श्रीहरि विष्णुजी की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की जाएगी। ऐसी मान्यता है कि जिनको संतान की प्राप्ति न होती हो, उन्हें आज के दिन नियम-संयम के साथ भगवान श्रीहरि के शरण में रहकर पुत्रदा एकादशी का व्रत-उपवास रखना चाहिए। प्रख्यात ज्योतिषविद्  विमल जैन ने बताया कि पौष शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 1 जनवरी, रविवार की सायं 7 बजकर 12 मिनट पर लग रही है जो 2 जनवरी, सोमवार की रात्रि 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। 2 जनवरी, सोमवार को एकादशी तिथि का मान होने से पुत्रदा एकादशी का व्रत इसी दिन रखा जाएगा।

भगवान् श्रीहरि की पूजा का विधान : विमल जैन ने बताया कि व्रतकर्ता को एकादशी के पूर्व रात्रि में भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। एकादशी तिथि (व्रत) के अपने दैनिक नित्य कृत्यों से निवृत्त होकर स्नान ध्यान के पश्चात् स्वच्छ वस्त्र धारण कर पुत्रदा एकादशी व्रत का संकल्प लेना चाहिए, पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान श्रीविष्णुजी की पूजा-अर्चना के पश्चात् उनकी महिमा में श्रीविष्णु सहस्रनाम, श्रीपुरुषसूक्त तथा श्रीविष्णुजी से सम्बन्धित मन्त्र ‘ॐ श्रीविष्णवे नमः’ या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप अधिक से अधिक संख्या में करना चाहिए।