बिहार के संझौली के करमैनी पंचायत में पर्यावरण बचाओ अभियान के तहत पौधारोपण किया गया। गत रविवार को करमैनी गांव में  मनीष कुमार द्वारा पर्यावरण को बचाने को लेकर पौधारोपण किया गया। पौधारोपण में आम, अमरूद और नीबू का सहित 101 फलदार पौधा लगाए गए। इस दौरान पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ का नारा दिया गया। इस अभियान में काफी संख्या में ग्रामीणों की भी सहभागिता रही। पौधारोपण के दौरान सम्मानित अतिथियों ने कहा कि जब से दुनिया शुरू हुई है, तभी से इंसान और कुदरत के बीच गहरा रिश्ता रहा है। पेड़ों से पेट भरने के लिए फल-सब्जियां और अनाज मिला। तन ढकने के लिए कपड़ा मिला। घर के लिए लकड़ी मिली। इनसे जीवनदायिनी ऑक्सीजन भी मिलती है, जिसके बिना कोई एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता। इनसे औषधियां मिलती हैं। पेड़ इंसान की जरूरत हैं, उसके जीवन का आधार हैं। अमूमन सभी मजहबों में पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया गया है। भारतीय समाज में आदिकाल से ही पर्यावरण संरक्षण को महत्व दिया गया है। इसलिए सभी को कम से कम एक-एक पौधा जरूर लगाना चाहिए। बिना पेड़ पौधे के हमलोग जीवित नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को पूजा जाता है। विभिन्न वृक्षों में विभिन्न देवताओं का वास माना जाता है। पीपल, विष्णु और कृष्ण का, वट का वृक्ष ब्रह्मा, विष्णु और कुबेर का माना जाता है, जबकि तुलसी का पौधा लक्ष्मी और विष्णु, सोम चंद्रमा का, बेल शिव का, अशोक इंद्र का, आम लक्ष्मी का, कदंब कृष्ण का, नीम शीतला और मंसा का, पलाश ब्रह्मा और गंधर्व का, गूलर विष्णू रूद्र का और तमाल कृष्ण का माना जाता है। इसके अलावा अनेक पौधे ऐसे हैं, जो पूजा-पाठ में काम आते हैं। जिनमें महुआ और सेमल आदि शामिल हैं। वराह पुराण में वृक्षों का महत्व बताते हुए कहा गया है कि जो व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, एक बड़, दस फूल वाले पौधे या बेलें, दो अनार दो नारंगी और पांच आम के वृक्ष लगाता है, वह नरक में नहीं जाएगा। पौधारोपण के मौके पर रमेश साह, छोटक ठाकूर, भीम कुमार, किसन कुमार, रवि पटेल, भंटु कुमार सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।