ब्रह्मांड अनेक रहस्यों से भरा हुआ है। हमारी मिल्की वे गैलेक्सी इसका एक छोटा सा हिस्सा है। इसमें पृथ्वी जैसा हरा-भरा जीवन संपन्न ग्रह भी है और ऐसे ग्रह भी हैं जो कोयले से भी ज्यादा काले हैं। कई साल पहले ऐसे ही एक प्लैनेट की खोज की गई थी जिसे अब तक का सबसे अंधकारमय ग्रह माना जाता है। बृहस्पति के आकार का यह विशालकाय एक्सोप्लैनेट, ट्रेस-2बी, कोयले से भी ज्यादा काला है। नासा के केपलर स्पेसक्राफ्ट ने इसकी खोज की थी जो सूरज जैसे तारे, जीएससी 03549-02811 के आसपास मौजूद है। यह 750 प्रकाश वर्ष दूर ड्रेको नक्षत्र की दिशा में मौजूद है। खबरों के अनुसार यह विशालकाय गैसीय ग्रह सूर्य की रौशनी के 1 फीसदी से भी कम हिस्से को परावर्तित करता है। यह गुण अब तक देखे गए किसी भी ग्रह या चंद्रमा की तुलना में इसे सबसे ज्यादा काला बनाता है। स्पेस डॉट कॉम की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार अध्ययन के प्रमुख लेखक और हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के एक खगोलविद डेविड किपिंग ने कहा कि यह अजीब है कि यह ग्रह इतना काला है, हमारे सौर मंडल में मौजूद किसी भी अन्य चीज की तुलना में यह कितना अलग है। उन्होंने कहा कि यह कोयले के सबसे काले टुकड़े से भी ज्यादा काला है। यह आपके डार्क ऐक्रेलिक पेंट से भी ज्यादा काला है। यह विचित्र है कि कैसे यह विशालकाय ग्रह उस पर पड़ने वाले पूरे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है। बृहस्पति ग्रह में सफेद और लाल रंग के बादल होते हैं, जो उस तक पहुंचने वाले सूर्य के प्रकाश के एक तिहाई से अधिक को परावर्तित करते हैं। लेकिन ट्रेस-2बी में परावर्तक बादलों की कमी होती है। इस एक्सोप्लैनेट के वातावरण का तापमान 980 डिग्री सेल्सियस से अधिक है क्योंकि इसका होस्ट-स्टार इससे सिर्फ 50 लाख किमी की दूरी पर मौजूद है। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के को-ऑर्थर डेविड स्पीगल ने एक बयान में कहा था, हालांकि यह पूरी तरह से काला नहीं है। पर यह इतना अधिक गर्म है कि इसमें एक लाल चमक बाहर निकलती है, बिल्कुल किसी जलते अंगारे की तरह। शोधकर्ताओं के लिए ग्रह का अंधेरा एक अनुसलझा रहस्य है।