आपने कभी सोचा है कि किसी भी भाषा को इतनी जल्दी कैसे सीख लेते हैं? दरअसल, मनुष्य दिमाग के एक खास हिस्से के साथ जन्म लेते हैं जो शब्दों और अक्षरों को देखने और ग्रहणशील होने के लिए प्री-वायर्ड होते हैं। यह हिस्सा ही हमें शब्दों को पढ़ने में मदद करता है। हाल ही अमरीका की ओहायो यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिकों ने अपने एक नए अध्ययन में इस बात की पुष्टि की है। 

पहले से ही जानते हैं पढ़नाः शोध के प्रमुख लेखक और ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के सहायक प्रोफेसर जीनेप सेगिन का कहना है कि दिमाग का यह हिस्सा दिखाई पड़ने वाले शब्दों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करता है। लेकिन, यह विजुअल वर्ड फॉर्म एरिया केवल साक्षर व्यक्तियों को ही पढ़ने में सक्षम बनाता है। कुछ शोधकर्ताओं का विचार था कि प्री-रीडिंग विजुअल वर्ड फॉर्म एरिया दिमाग के विजुअल कॉर्टेक्स के अन्य हिस्सों की ही तरह है जो हमें दूसरों के चेहरे, दृश्य या अन्य वस्तुओं को देखने के लिए संवेदनशील बनाते हैं। बस ये विजुअल कॉर्टेक्स केवल शब्दों और अक्षरों के लिए चयनात्मक हो जाते हैं जब बच्चे शुरू-शुरू में पढ़ना या भाषा सीखने का प्रयास करते हैं। 

प्री-प्रोग्राम्ड होता है यह हिस्साः सेगिन का कहना है कि नवजात बच्चों पर किए अध्ययन में हमने पाया कि शब्दों और अक्षरों को पहचानने की यह काबिलियत जन्म के पहले से ही दिमाग में प्री-प्रोग्राम्ड होती है। यानी अपनी भाषा के संपर्क में आए बिना ही हमें शब्दों को देखना और अक्षरों को पहचानना आ जाता है। अध्ययन में नवजात शिुशओं और वयस्कों के वीडब्ल्यूएफ विजुअल कॉर्टेक्स में कुछ अंतर भी पाए गए। हमारा मानना है कि वीडब्ल्यूएफ के साथ बोलने और लिखने की हमारी क्षमता से गहरा संबंध है। क्योंकि यह हमार लैंग्वेज सर्किट से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। जैसे-जैसे व्यक्ति साक्षर होता जाता है यह हिस्सा विजुअल कॉर्र्टेक्स से और अलग होता जाता है।