जोरहाटः असम कृृषि विश्वविद्यालय में किसानों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यशाला आज शुरू की गई। आज उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेते हुए असम कृृषि विश्वविद्यालय के कृृषि अनुसंधान संचालक डॉ. अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि मौजूदा समय में कृृषि क्षेत्र में बहुत बदलाव आ रहे हैं। साथ ही कृृषि कार्य व्यवस्था भी बदल रही है। नई-नई तकनीक के साथ किसानों को आगे बढ़ना होगा, ताकि किसानों को आर्थिक रूप से मदद मिलने के साथ फसलों की उत्पाद में बढ़ोत्तरी हो सके। उन्होंने ने कहा कि नई कार्य व्यवस्था के लिए विश्व के उन्नत देश के जैसे मिट्टी को और अधिक उपजाऊ बनाना होगा। उन्होंने कहा कि उन्नत फसल के लिए जमीन की गुणवत्ता को लेकर जागरूक रहना चाहिए। उनका कहना था कि अधिक लाभ के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशकों की इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। असम कृृषि विश्वविद्यालय के सौजन्य से और विश्वविद्यालय के भूमि विज्ञान के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में विभाग के अध्यापक डॉ. दिलीप कुमार पाटगिरी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। भूमि विज्ञान विभाग के अध्यापक डॉ. विपुल डेका संचालन में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए भारप्राप्त कृृषि विज्ञानगुरू डॉ. एमके मोदी ने कहा कि हरित क्रांति के जरिए देश में खाद्य फसलों का उत्पाद बढ़ती है। लेकिन कभी-कभी ये प्राकृृतिक परिवेश में दुष्प्रभाव डालता है। कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए स्नातकोत्तर शिक्षा संचालक डॉ. अनुप कुमार दास ने कहा कि प्राकृृतिक कृृषि पद्धति और आधुनिक कृृषि पद्धति दोनों को एक साथ लेकर अगर किसान आगे बढ़ता है तो किसानों के सामने आए समस्या को आसानी से समाधान किया जा सकता है। भारतीय कृृषि अनुसंधान केंद्र के आर्थिक सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में देश के नौ राज्यों के कृृषि तथा भूमि विज्ञान के अध्यापक, अनुसंधानकर्ता और वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे है। कार्यशाला में असम कृृषि विश्वविद्यालय के विस्तारण शिक्षा संचालक डॉ. प्रसन्न कुमार पाठक, उत्तर-पूर्व जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के संचालक डॉ. विद्युत कुमार शर्मा, राष्ट्रीय भूमि समीक्षा और भूमि व्यवहार परिकल्पना विभाग के पूर्वोत्तर प्रमुख डॉ. उदय सैकिया, असम कृृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी डॉ. निलोत्पल बरठाकुर, सहयोगी कृृषि अनुसंधान संचालक डॉ. मृणाल सैकिया सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रमुख अध्यापक, अनुसंधानकर्ता व शिक्षार्थी मौजूद थे।