गुजरात, हिमाचल प्रदेश विधानसभा एवं दिल्ली एमसीडी के लिए मतदान हो चुका है। उम्मीदवारों का भविष्य ईवीएम में कैद हो चुका है। मतदान के बाद विभिन्न एजेंसियों द्वारा कराए गए एग्जिट पोल में गुजरात में भाजपा को बहुत मिलता दिखाया गया है। लगभग सभी सर्वे में भाजपा को पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा बढ़त मिल रही है। गुजरात का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है। आम आदमी पार्टी ने भी इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। हालांकि कांग्रेस के तरफ से इस चुनाव में धुआंधार प्रचार नहीं हुआ। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी केवल एक दिन के लिए गुजरात के दौरे पर आए थे। इसके बावजूद गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस की अच्छी पैठ दिख रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस भाजपा को अच्छी टक्कर दे रही है। लेकिन शहरी क्षेत्रों में भाजपा का दबदबा कायम है। 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा को 110 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं। अपनी साख बचाने के लिए भाजपा ने पहले से ही पूरी कोशिश की थी। हार्दिक पटेल एवं अल्पेश ठाकोर को भाजपा में लाना इसी रणनीति का एक हिस्सा है। पाटीदारों एवं दूसरे पिछड़े वर्ग के लोगों को अपनी तरफ खींचने के लिए भाजपा ने यह कदम उठाया था। इसके अलावा सरकार विरोधी लहर को कम करने के लिए पार्टी ने चुनाव से कुछ महीने पहले ही मुख्यमंत्री सहित पूरी कैबिनेट को बदल दिया था। इसके अलावा चुनाव में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को टिकट से वंचित कर दिया गया। अनेक युवाओं को भी मैदान में उतारा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार गुजरात के दौरे पर थे तथा वे चुनावी रैलियों के साथ-साथ रोड शो भी किए। 50 किमी लंबा रोड शो यह दिखाने के लिए काफी है कि प्रधानमंत्री इस चुनाव के प्रति कितने गंभीर थे। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के चुनाव के बारे में विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए एग्जिट पोल में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर दिख रही है। दोनों पार्टियों के मतों के प्रतिशत में केवल 2 प्रतिशत तथा सीटों के हिसाब से 5 से 6 सीटों का अंतर दिखाया जा रहा है। इसका मतलब साफ है कि दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर चल रही है। यही कारण है कि चुनाव में जीतने की संभावना वाले निर्दलीयों पर भी दोनों पार्टियों के नेता डोरे डालना शुरू कर दिए हैं। भाजपा और कांग्रेस के बागी नेताओं को मनाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। बागी नेताओं के मैदान में उतरने के कारण कई सीटों पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को कड़ी चुनौती मिल रही है। हिमाचल प्रदेश का चुनाव भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के लिए अग्नि परीक्षा के समान है। अगर भाजपा बहुमत से दूर रहती है तो इससे नड्डा की छवि को धक्का लगेगा। कुल मिलाकर दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम पर सबकी नजर लगी हुई है। 8 दिसंबर को होने वाले मतगणना में तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी कि किस पार्टी के सिर पर सेहरा बंधेगा। दिल्ली एमसीडी का चुनाव भी मोदी सरकार के लिए राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी अहम है। इस बार के एग्जिट पोल में एमसीडी में आम आदमी पार्टी (आप) की बढ़त को दिखाया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो अरविंद केजरीवाल के लिए यह बड़ी जीत कही जा सकती है। दिल्ली की गद्दी पर काबिज होने के बाद एमसीडी पर कब्जा करने से आप की स्थिति और मजबूत होगी। अगर एमसीडी पर आप का कब्जा हो जाता है तो इसका असर दिल्ली में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव पर निश्चित रूप से पड़ेगा। पिछले कुछ महीनों से आप एमसीडी के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही थी। ऐसा लग रहा है कि आम आदमी पार्टी द्वारा शुरू की गई रेवड़ी संस्कृृति का मतदाताओं के ऊपर असर हो रहा है। इस बार कांग्रेस भी गुजरात चुनाव में रेवड़ी संस्कृृति के मार्ग पर आगे बढ़ी है। एमसीडी चुनाव में आप की सफलता के पीछे रेवड़ी संस्कृृति सबसे बड़ा कारण है। पंजाब चुनाव में भी आप की रेवड़ी संस्कृृति ने पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया है। अगर इसी तरह की संस्कृृति जारी रही तो शायद दूसरी पार्टियां भी रेवड़ी संस्कृृति पर चलने को मजबूर होगा। अब 8 दिसंबर को ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कौन किस पर कितना भारी पड़ रहा है।
एग्जिट पोल
