इंडोनेशिया के बाली में हुए जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जलवा देखने को मिला। सम्मेलन के दौरान मोदी छाए रहे। जी-20 के घोषणा पत्र में मोदी के दिए गए सुझाव को शामिल किया गया है। मालूम हो कि सितंबर महीने में समरकंद में हुए शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति के साथ भेंट के दौरान कहा था कि महाशय, यह समय युद्ध का नहीं है। समस्या का समाधान कूटनीति एवं बातचीत के द्वारा किया जाना चाहिए। जी-20 के शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी का यह वाक्य छाया रहा। प्रधानमंत्री ने इस अधिवेशन के दौरान अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग, फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मेक्रों, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो, इटली के प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी तथा जर्मनी के चांसलर के साथ वैश्विक, क्षेत्रीय एवं द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया में बढ़ते तनाव तथा आर्थिक मंदी को देखते हुए इस शिखर सम्मेलन पर सबकी निगाहें टिकी हुई थीं। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर दुनिया की नजर प्रधानमंत्री मोदी पर लगी हुई थी। इस युद्ध के दौरान दुनिया के सभी देश किसी न किसी पक्ष में काम कर रहे हैं। भारत इस पूरे मामले में तटस्थ भूमिका निभा रहा है। जी-20 के घोषणा पत्र में यूक्रेन संघर्ष को तत्काल खत्म करने एवं शत्रुता समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत दुनिया की समस्याओं को अपनी समस्या मानकर आगे बढ़ रहा है। भारत दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की दिशा में काम करेगा। मालूम हो कि भारत 1 दिसंबर से जी-20 की अध्यक्षता करेगा। इसके लिए मेजबान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को इस सम्मेलन के दौरान दायित्व सौंप दिया है। अगला शिखर सम्मेलन भारत में होगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया में राजनीतिक तनाव चरम पर है, आर्थिक मंदी लगातार गहराता जा रहा है। ऊर्जा की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है तथा महामारी का प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसी विषम स्थिति में भारत के कंधों पर जी-20 का नेतृत्व करने का दबाव है। प्रधानमंत्री ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी अनौपचारिक भेंट की है। लद्दाख से अरूणाचल प्रदेश तक भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव के बीच शिष्टाचार मुलाकात की अपनी अहमियत है। अमरीकी राष्ट्रपति बाइडेन ने भी चीनी राष्ट्रपति से भेंट की है तथा ताइवान एवं नॉर्थ कोरिया का मुद्दा उठाया। अमरीका ने चीन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि वह उत्तर कोरिया को विनाशकारी कार्य करने से रोके। साथ में अमरीका ने यह भी कहा कि वह ताइवान के साथ हमेशा खड़ा रहेगा तथा उसकी संप्रभुता की रक्षा के लिए साथ देता रहेगा। मालूम हो कि ताइवान के मुद्दे पर अमरीका एवं चीन के बीच लगातार तनातनी जारी है। अमरीकी कांग्रेस की स्पीकर नेंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद अमरीका एवं चीन के संबंध बेहद खराब दौर में पहुंच गए हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सुनक के साथ मोदी की वार्ता हुई। दोनों नेता गर्मजोशी के साथ मिले। ऐसी खबर है कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता मार्च 2023 तक हो पाएगा। पहले इस समझौते को लेकर संशय का वातावरण बना हुआ था। हालांकि इस सम्मेलन के दौरान अधिकांश देशों ने यूक्रेन पर हमले के लिए रूस की आलोचना की है किंतु भारत यहां भी तटस्थ भूमिका में रहा है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन सुरक्षा कारणों से इस सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके। उनकी जगह विदेश मंत्री सर्गेइ लवारोव इस सम्मेलन में शामिल हुए। कुल मिलाकर  जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आकर्षण का केंद्र बने रहे। दुनिया के नेता उनसे मिलने के लिए बेताब नजर आ रहे थे। इस वक्त दुनिया बारूद के ढेर पर खड़ी है, जहां महंगाई चरम पर है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकुशलता की अग्नि परीक्षा होने वाली है।