जोरहाटः माजुली दक्षिणपाट सत्र के सत्रीया जनार्दन देव गोस्वामी द्वारा सत्रनगरी माजुली में दुर्गा पूजा आयोजन करने और महापुरूष श्रीमंत शंकरदेव के बारे में दिए गए बयान को लेकर पूरे राज्य में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। साथ ही इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया में भी काफी चर्चा हो रही है। इस बीच राज्य के विभिन्न संगठन तथा व्यक्ति सहित असम सत्र महासभा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस पर माजुली जिला सत्र महासभा के सौजन्य से नतुन कमालाबाड़ी सत्र में असम सत्र महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष तथा माजुली स्थित गड़मुर होरू सत्र के सत्राधिकार हरिदेव गोस्वामी की अध्यक्षता में एक जनसभा का आयोजन किया गया। सभा में माजुली जिले के विभिन्न दल-संगठन के प्रतिनिधि, गणमान्य व्यक्ति तथा सैकड़ों माजुलीवासी उपस्थित थे। सभा में विभिन्न वक्ताओं ने जनार्दन देव गोस्वामी के इस कार्य की कड़े शब्दों से निंदा की। साथ ही कई वक्ताओं ने कहा कि उनके द्वारा दिए गए इस बयान के पीछे तीसरे शक्ति का हाथ है। सभा में हिस्सा लेते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि असम सत्र महासभा से  बहिष्कृृत किए गए जनार्दन देव गोस्वामी किसी भी सत्र के सत्राधिकार नहीं है। साथ ही लोगों का कहना था कि ऐतिहासिक दक्षिणपाट सत्र के सत्राधिकार ने यह साफ किया था कि जगत गुरू श्रीमंत शंकरदेव के बारे में दिए गए बयान दक्षिणपाट सत्र का नहीं है। साथ ही सत्राधिकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि एक विशेष संगठन के अध्यक्ष के रूप में उनका यह अपना बयान है, इसमें ऐतिहासिक दक्षिणपाट सत्र का कोई संबंध नहीं है। सभा में लोगों ने कहा कि माजुली में ईसाई धर्म के अतिक्रमण रोकने के नाम पर इस तरह की बयानबाजी माजुली के भाईचारे में असर डालेगी। साथ ही जगतगुरू श्रीमंत शंकरदेव के बारे में दी टिप्पणी बयान को लेकर अगर गोस्वामी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे तो आने वाले दिनों में माजुली के धार्मिक, सामाजिक व  सांस्कृृतिक क्षेत्रों में खासा असर पड़ेगा। सभा में यह निर्णय लिया गया है कि गोस्वामी के इस अपराध के लिए आने वाले 24 घंटों के भीतर माफी मांगने के साथ भविष्य में ऐसी गलती न दोहरने का वचन देना पड़ेगा।