कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रख भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत इस साल 20 अक्तूबर को शाम 04 बजकर 04 मिनट से हो रही है। वहीं ये तिथि अगले दिन 21 अक्तूबर को शाम 05 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, रमा एकादशी का व्रत 21 अक्तूबर को रखा जाएगा। मान्यता के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, यहां तक कि ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी दूर होते हैं। सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए यह व्रत सुख और सौभाग्यप्रद माना गया है।
व्रत के बारे में खास बातें- रमा एकादशी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत करने के लिए संकल्प लें। जिस प्रकार आप व्रत कर सकते हैं, उसी के अनुसार संकल्प लें, जैसे- यदि पूरा दिन निराहार रहना चाहते या फिर एक समय फलाहार करना चाहते हैं। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधानपूर्वक पंचोपचार पूजा करें। यदि आप स्वयं पूजा नहीं कर सकते तो किसी योग्य ब्राह्मण को पूजा के लिए बुलाएं। इसके बाद भगवान को भोग लगाएं व प्रसाद भक्तों को बांट दें। इसी प्रकार शाम को भी भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। रात के समय भगवान की मूर्ति के पास बैठकर श्रीमद्भागवत या गीता का पाठ करें। अगले दिन ब्राह्मणों को आमंत्रित करें। ब्राह्मणों को भोजन करवा कर, दान-दक्षिणा देकर ससम्मान विदा करें। उसके बाद ही भोजन ग्रहण करें। पुराणों के अनुसार रमा एकादशी व्रत कामधेनु और चिंतामणि के समान फल देती है। इसे करने से व्रती अपने सभी पापों का नाश करते हुए भगवान विष्णु का धाम प्राप्त करता है। मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।