अमरीका जैसे देश पर कभी भी आंख बंद कर विश्वास नहीं किया जा सकता। अमरीका अपने स्वार्थ के अनुसार किसी देश के साथ संबंध विकसित करता है। दूसरे को मानवता का पाठ पढ़ाने वाले अमरीका को पहले अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए। अमरीका ने हाल ही में भारत में हो रही सांप्रदायिक तनाव के बारे में बयान दिया था। रूस का साथ नहीं छोड़ने के कारण अमरीका भारत से काफी नाराज है। इसका कारण भारत को संदेश देने के लिए अमरीका ने पाकिस्तान के प्रति अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को सहायता देना बंद कर दिया था, लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ट्रंप की नीति को पलटते हुए एफ-16 विमानों के रख-रखाव के लिए 45 करोड़ डॉलर देने की घोषणा की है। इसके अलावा पाक को मानवीय सहायता के रूप में काफी मदद दी है। भारत अमरीका की इस दोहरी नीति को भलीभांति समझता है। यही कारण है कि अमरीका एवं पश्चिमी देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्रसंघ में चीन के खिलाफ मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ लाये गए प्रस्ताव से भारत ने अपने को अलग कर लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि यह प्रस्ताव 17 के मुकाबले 19 वोटों से गिर गया। इससे बौखलाये अमरीका ने एक ट्रेवल एडवाइजरी जारी कर अपने नागरिकों को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, लेह, तेलंगाना एवं पश्चिम बंगाल सहित कुछ इलाकों में जाने से सावधान किया है। अमरीका का कहना है कि इन क्षेत्रों में जाना खतरे से खाली नहीं है। हालांकि अमरीका ने पाकिस्तान के लिए भी ट्रेवल एडवाइजरी जारी की है, किंतु वह भारत के मुकाबले कमजोर है। भारत के खिलाफ अमरीका ने लेबल-2 की एडवाइजरी जारी की है, जबकि पाकिस्तान को लेबल-3 की। यह सबको मालूम है कि भारत की स्थिति पाकिस्तान से काफी बेहतर है। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत में कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। इसके बावजूद अमरीका द्वारा इस तरह का एडवाइजरी जारी करना उसकी दोहरी नीति को दर्शाता है। खुद अमरीका में नस्लीय घटनाएं होती रहती हैं। पूर्व राष्ट्रपति ट्रंक के शासनकाल में अमरीका में कई नस्लीय घटनाएं हुईं। बाइडेन के शासन में भी कैलिफोर्निया में एक सिख परिवार का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई। यह परिवार पंजाब के होशियारपुर का रहने वाला था। इसके अलावा अमरीका में भारतीय महिलाओं के खिलाफ हेट क्राइम बढ़ रहा है। साड़ी पहनने वाली महिलाओं के साथ बदतमीजी की घटनाएं हुई हैं। टैक्सास एवं कैलिफोर्निया में भारतीय मूल की महिलाओं के साथ हमले हुए हैं। ऐसी खबर है कि बदमाशों ने ऐसी महिलाओं की कलाई तोड़कर आभूषण लूट लिया। पहले भी भारतीयों के साथ अमरीका में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसी स्थिति में अमरीका को पहले अपना घर ठीक करना चाहिए, उसके बाद ही दूसरों के घर में ताक-झांक करना चाहिए। पश्चिमी मीडिया को अमरीका एवं अन्य पश्चिमी देशों में हो रहे मानवाधिकार के हनन का मामला नहीं दिखता है। हाल ही में ब्रिटेन में जो सांप्रदायिक घटनाएं हुईं वह बताने के लिए काफी है कि पश्चिमी देश भी अब सुरक्षित नहीं हैं। अमरीका एवं पश्चिमी देश आतंकवाद के मुद्दे पर भी अलग-अलग नीति अपनाते रहे हैं। जिन देशों के साथ उनके स्वार्थ जुड़े हुए हैं उन देशों में हो रही आतंकी घटनाओं पर उनकी नजर नहीं जाती है। हाल ही में अमरीका एवं जर्मनी ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसके समाधान की आवश्यकता पर बल दिया है। यह सबको मालूम है कि जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को भारत का अभिन्न हिस्सा है। ऐसी स्थिति में इस समस्या का एकमात्र समाधान यह है कि पाकिस्तान पीओके को तत्काल खाली कर दे। भारत ने अमरीका एवं जर्मनी को करारा जवाब देकर उसकी औकात बता दी है। भारत ने कहा है कि दोनों देशों को आतंकवाद की फैक्ट्री बंद करने के लिए पाकिस्तान को कहना चाहिए था। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत तटस्थ नीति अपना कर सही निर्णय लिया है। रूस हमेशा से भारत का साथ देता आया है।
अमरीका की दोहरी नीति
