देश की राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रीय जनता दल (राजद)की राष्ट्रीय कार्यकारणी की दो दिन की बैठक आज रविवार को शुरू हो गई,इसमें राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह शामिल नहीं हुए हैं। हालांकि,उनके बेटे विधायक सुधाकर सिंह पहुंचे हैं। सुधाकर सिंह ने हाल ही में नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा दिया था। बिहार के कृृषि मंत्री के पद पर काबिज सुधाकर सिंह ने पिछले महीने एक बयान दिया था,जिस पर हुए विवाद के चलते उन्हें मंत्री पद की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में ही बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का ऐलान किए जाने की संभावना थी।  तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने ही दिया था,लेकिन राष्ट्रीय बैठक में उनके ही नहीं पहुंचने पर तेजस्वी यादव के इस प्रमोशन पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। जगदानंद सिंह के बैठक में शामिल नहीं होने पर राजद प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि उनकी गैर मौजूदगी की कोई वजह नहीं हैं। साथ ही उन्होंने इस्तीफे की खबरों का खंडन किया,वहीं रविवार को बैठक के पहले दिन राजद के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक पर गाली देने का आरोप लगाते हुए नीतीश कैबिनेट में मंत्री और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप बैठक से नाराज होकर निकल गए। साथ ही उन्होंने श्याम रजक पर आरएसएस का एजेंट होने का आरोप लगाया। इसके अलावा लालू यादव को निर्विरोध राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने पर कार्यकारिणी की मुहर लगा दी गई। लालू यादव 12वीं बार राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। अध्यक्ष की ताजपोशी सोमवार को होगी। बिहार में जातिगत जनगणना करवाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके साथ ही केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए गए। आज की बैठक में तीन अहम प्रस्ताव पारित किए गए, जिसमें कहा गया कि मोदी सरकार की विदेश नीति ढुलमुल है। देश के हालात गंभीर हैं। देश में बेरोजगारी है। मोदी सरकार के पास कोई ब्लूप्रिंट नहीं है। केवल हिंदू-मुस्लिम की बात करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि मतभेद और अहं को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना होगा। बदलाव की बयार बिहार से शुरू हुई है। साथ बैठने से बेहतर विकल्प बनेगा। विपक्ष में मुद्दों पर बात होगी,व्यक्ति पर नहीं। मोदी का विकल्प सामूहिकता ही है, जो जाति व्यवस्था को पनपा रहे हैं, उनके मुंह से खत्म करने की बात समझ नहीं आती। लालू परिवार के खिलाफ जारी चार्जशीट सीबीआई की चार्जशीट नहीं है,यह बीजेपी की है। स्वायत्त संस्थाओं के चरित्र को खत्म कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि राजद की बैठक उस समय हो रही है,जब सीबीआई की ओर से लालू प्रसाद सहित 16 लोगों के खिलाफ लैंड फॉर जॉब मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है। ऐसे में काफी संभावनाएं हैं कि एक बार फिर लालू प्रसाद यादव को जेल जाना पड़े। दूसरी ओर परिवार के अन्य सदस्यों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। इसी बीच इस कार्यक्रम का आयोजन काफी महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर इस बात की संभावना है कि लालू प्रसाद यादव तेजस्वी को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दें ताकि उनकी अनुपस्थिति में तेजस्वी पार्टी का अच्छी तरह से संचालन कर सकें। इस बैठक का इसलिए भी बड़ा महत्व है कि राज्य में गठबंधन की सरकार बनने के बाद राजद की यह पहली राष्ट्रीय स्तर की बैठक है। दूसरी ओर इस बैठक में अगले लोकसभा चुनाव-2024 और विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर अभी से ही रूप-रेखा बनाने की शुरुआत कर दी जाएगी ताकि देश में सत्ता परिवर्तन हो सके और 2025 में तेजस्वी मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव जीत सकें। नीतीश कुमार को देश का प्रधानमंत्री बनाना पार्टी की पहली प्राथमिकता है और वह इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। कुल मिलाकर यह बैठक राजद के लिए काफी महत्वपूर्ण है, जो पार्टी के लिए भविष्य की रणनीति को तय करेगी। वर्तमान समय में पार्टी के पास सत्ता है, परंतु उसके मुखिया यदि जेल में चले जाते हैं तो उनकी अनुपस्थिति में पार्टी का ताना-बाना बिखर सकता है।