शिलांग : पुलिस ने गुरुवार को मुख्य सचिवालय के सामने अपने परिवारों समेत आंदोलन करने वाले संविदा शिक्षकों के खिलाफ आंसू गैस का इस्तेमाल किया। शिक्षकों ने बताया कि आंसू गैस के गोले दागने से ज्यादातर बच्चे और गर्भवती महिलाएं प्रभावित हुईं। संविदा शिक्षक एक महीने से अधिक समय से सिविल अस्पताल जंक्शन पर आंदोलन कर रहे हैं। शिक्षकों ने कहा कि उन्हें अपने परिवारों को लाने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि सेवाएं समाप्त होने के बाद वे प्रभावित हुए थे। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि किसी मजिस्ट्रेट ने पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने का आदेश दिया या पुलिस ने स्वयं यह फैसला लिया। जानकारी के अनुसार ऑल मेघालय गवर्नमेंट एलपी स्कूल कांट्रेक्टच्युअल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरबोर रियांगटेम को भी चोटें आईं। पुलिस के रोकने के बाद भी संविदा शिक्षकों का मार्च जारी रहा। वहीं सचिवालय की पहाड़ियों पर धारा 144 सीआरपीसी लगाई गई है। ऑल मेघालय गवर्नमेंट एलपी स्कूल कॉन्ट्रैक्चुअल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने दावा किया कि जिस जगह पर वे विरोध कर रहे थे, वह सरकार की साइट से काफी दूर है। उल्लेखनीय है कि 800 से अधिक संविदा शिक्षक गत 7 सितंबर से विरोध कर रहे हैं। आंदोलनकारी शिक्षक गत वर्ष उनकी सेवाओं को समाप्त करने के बाद पुनः बहाली की मांग कर रहे थे। इससे पहले, बीरबोर रियांगटेम ने मीडिया को बताया कि हालांकि मेघालय शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमटीईटी) 2010 में शुरू की गई थी, परीक्षा केवल 2019 में आयोजित हुई थी।