आर्थिक मंदी एवं बाढ़ से हुई भीषण तबाही के बीच पाकिस्तान फिर से अमरीका के चंगुल में फंसता दिख रहा है। अपने सदाबहार दोस्त चीन द्वारा आर्थिक मदद देने से आना-कानी करने के बाद पाक के पास अमरीका के सामने झोली फैलाने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा है। अलकायदा के सरगना जवाहिरी के खात्मा के लिए पाकिस्तान ने जिस तरह अमरीका की मदद की उसके बाद दोनों देशों के संबंध सुधरने लगे हैं। अमरीका ने पाकिस्तान में मौजूद एफ-16 लड़ाकू विमानों के रख-रखाव एवं उन्नतिकरण के लिए भारी रकम देने की घोषणा की है। इसके अलावा पाकिस्तान में आई बाढ़ से हुई तबाही को देखते हुए मानवीय सहायता भी भेजी है। भारत द्वारा अमरीका की शर्त मानने से इनकार करने के बाद अमरीका पाकिस्तान को सहायता देकर भारत को संदेश देने का प्रयास किया है। भारत किसी भी कीमत पर रूस का साथ छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसी स्थिति में अमरीका पाक को भी अपने पाले में रखकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश में लगा हुआ है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल बाजवा अभी अमरीका के दौरे पर हैं। अमरीका बिना स्वार्थ के किसी भी देश की मदद नहीं करता। ऐसी खबर है कि बाजवा के साथ हुई मुलाकात के दौरान अमरीका ने आर्थिक मदद देने तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष एवं विश्व बैंक से मदद दिलाने के बदले कुछ कड़ी शर्तें पाकिस्तान के समक्ष रही है। अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान अपने यहां चीन द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं की जानकारी अमरीका को दे। साथ ही अमरीका यह भी चाहता है कि पाकिस्तान में मौजूद चीनी सैनिकों की गतिविधियों के बारे में खबर दी जाए। अगर पाक अमरीका की शर्त मान लेता है तो चीन के साथ तनाव निश्चित रूप से बढ़ेगा। पाक कभी नहीं चाहेगा कि चीन उसका दुश्मन बन जाए, क्योंकि वह ड्रैगन के कर्जजाल में फंसा हुआ है। पाकिस्तान में आई बाढ़ एवं किसान आंदोलन के कारण वहां की अर्थ-व्यवस्था चरमरा गई है। पाक ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष से अनुरोध किया है कि वह अगले छह माह के लिए आर्थिक सहायता के बदले थोपे गए शर्तों में ढील दे। पाकिस्तान की करेंसी क्राइसिस लगातार बढ़ती जा रही है। पाक यह भी चाहता है कि अमरीका कश्मीर के मुद्दे पर उसका समर्थन करे। अमरीका कश्मीर के मुद्दे पर सावधानी से आगे बढ़ रहा है, क्योंकि उसको पता है कि अगर भारत नाराज हो गया तो उसके लिए आगे का रास्ता कठिन हो जाएगा। हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की मनमानी को रोकने के लिए अमरीका को भारत का सहयोग चाहिए। अगर भारत इस मामले से अपने को दूर कर लिया तो इस क्षेत्र में चीन का पलड़ा भारी हो जाएगा। पाक के प्रति अमरीका की वर्तमान नीति से भारत को भी सतर्क होने की जरूरत है। अमरीका जैसे देश पर आंख बंद कर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस का साथ नहीं छोड़ा। भारत को पूरे मामले में सजग रहने की जरूरत है।
अमरीकी चंगुल में फंसता पाक
