नौ महीने के इंतजार के बाद देश को फिर नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) मिल गया है। केंद्र सरकार ने अवकाशप्राप्त ले. जनरल अनिल चौहान को नया सीडीएस नियुक्त किया है। दिसंबर 2021 में हुए विमान दुर्घटना में देश के पहले सीडीएस विपिन रावत की मौत हो गई थी। उसके बाद से ही नए सीडीएस की तलाश जारी थी। केंद्र सरकार ने सेना के तीनों अंगों के कई अधिकारियों पर विस्तार से गौर करने के बाद अनिल चौहान की नियुक्ति की है। अनिल चौहान मई 2021 को सेना के पूर्वी कमान के प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे। अब चौहान के सामने काफी चुनौती है। भारत-चीन सीमा पर दो वर्षों से तनाव चल रहा है। कई क्षेत्रों में दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामने आंख में आंख मिलाकर खड़ी हैं। पाकिस्तान के साथ पहले से ही टकराव चल रहा है। चीन और पाकिस्तान मिलकर लगातार भारत के सामने चुनौती प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सीडीएस चौहान पर बड़ी जिम्मेवारी आ गई है। चौहान को जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। म्यामां में हुए ऑपरेशन एवं बालाकोट स्ट्राइक के पीछे चौहान की रणनीति माना जा रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र का विशेषज्ञ होने के नाते वे भारत-चीन के बीच चल रहे टकराव के मामले में विशेष भूमिका निभा सकते हैं। चौहान का मुख्य काम तीनों सेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने तथा सरकार और सेना के बीच सेतु का काम करना है। वे सैनिक मामलों के विभाग के सचिव के रूप में भी काम करेंगे। स्व. विपिन रावत ने सेना के तीनों अंगों को मिलाकर जो एकीकृत थिएटर कमान बनाने की पहल शुरू की थी, उसको पूरा करना चौहान का दायित्व होगा। 1962 में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध, 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए करगिल युद्ध के समय सेना और वायु सेना के बीच समन्वय का अभाव देखा गया। 1962 के युद्ध में वायु सेना के इस्तेमाल नहीं होने के कारण भारत को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। 1999 में करगिल युद्ध के दौरान वायु सेना के देर से इस्तेमाल होने के कारण ज्यादा सैनिकों को शहादत देनी पड़ी थी। उसी के बाद केंद्र सरकार ने वर्तमान विदेश मंत्री एस जयशंकर के पिता कृष्णास्वामी सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था जिसने सीडीएस नियुक्ति की सिफारिश की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को लाल किले के प्राचीर से सीडीएस नियुक्त करने की घोषणा की थी। उसके बाद ही विपिन रावत को यह जिम्मेवारी मिली थी। दिलचस्प बात यह है कि चौहान भी उसी गोर्खा राइफल्स से आते हैं, जहां से रावत आए थे। दोनों ही सीडीएस उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से आते हैं। गोर्खा राइफल्स में चौहान का 40 का अनुभव है जो तीनों सेनाओं को मजबूती देने में काम आएगा। तीनों सेनाओं को मिलाकर थिएटर कमान बनाने से देश की फौज काफी आक्रामक और मजबूत हो जाएगी। चीन सहित कई देश थिएटर कमान का प्रयोग कर चुके हैं। अगर थिएटर कमान का काम पूरा हो गया तो भारतीय सेना काफी शक्तिशाली हो जाएगी तथा युद्ध के समय उसकी आक्रामक क्षमता बढ़ जाएगी। उम्मीद है कि चौहान स्व. विपिन रावत के अधूरे काम को पूरा कर पाएंगे।
नए सीडीएस के समक्ष चुनौती
