उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सफल कूटनीति का लोहा मनवा लिया। दुनिया में मोदी की कूटनीति की तारीफ हो रही है। ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ जैसे भारत विरोधी अमरीकी अखबार ने भी एससीओ में मोदी की भूमिका की प्रशंसा की है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अभी युद्ध का समय नहीं है, शांति होनी चाहिए। कोरोना और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया में सप्लाई लाइन बाधित हो गई है। इससे विश्व में खाद्य एवं ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। सप्लाई लाइन बाधित होने से खाद्यान्न निर्धारित जगह पर नहीं पहुंच पा रहा है। इसी तरह तेल एवं गैस की आपूर्ति में भी विघ्न पैदा हो रहा है। इन दोनों संकटों के कारण दुनिया के देशों को महंगाई एवं किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। रूस के राष्ट्रपति ने भी यूक्रेन से युद्ध समाप्त करने की पहल का समर्थन किया है। मोदी द्वारा रूस को दिए गए इस सीधे संदेश को पश्चिमी मीडिया उछाल रहा है। अब इसके पीछे भारत और रूस की क्या कूटनीति है, इसका तो खुलासा नहीं हुआ है, किंतु भारत ने युद्ध बंद करने की अपील कर दुनिया को यह बता दिया है कि भारत की विदेश नीति किसी के दबाव में नहीं है। मालूम हो कि 15 एवं 16 सितंबर को समरकंद में एससीओ के देशों का शिखर सम्मेलन हुआ जिसमें भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान स्थाई सदस्य हैं। इसके अलावा अजरबेजान, आर्मेनिया, कंबोडिया, नेपाल, श्रीलंका एवं तुर्की को संवाद भागीदार राष्ट्र का दर्जा दिया हुआ है। ये सभी देश इसमें शामिल हुए। एससीओ में शामिल आठ देशों की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का 41 प्रतिशत है, जबकि क्षेत्रफल के हिसाब 60 प्रतिशत हिस्सा इन देशों के पास है। इन आठ देशों के पास दुनिया की 30 प्रतिशत जीडीपी है। इन आठ में चार देश चीन, रूस, भारत और पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश हैं। ऐसी स्थिति में इस संगठन के मंच से उठी किसी भी आवाज की अहमियत होगी। अमरीका तथा पश्चिमी देश एससीओ शिखर सम्मेलन की तरफ बराबर नजर टिकाये हुए थे, क्योंकि इस शिखर सम्मेलन में शामिल ज्यादातर देश अमरीका विरोधी हैं। इसमें भारत की भूमिका पर सबकी नजर लगी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण से यह साबित कर दिया कि भारत किसी भी पक्ष की तरफ झुका हुआ नहीं है। शिखर सम्मेलन में साथ-साथ रहने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं की। मोदी ने बातचीत नहीं कर चीन को यह कड़ा संदेश दिया कि जब तक सीमा विवाद की समस्या का समाधान नहीं हो जाता तब तक संबंध सामान्य नहीं हो सकते। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि गोगरा एवं हॉटस्प्रिंग से चीनी सैनिकों की वापसी के बाद समरकंद में भारत और चीन के राष्ट्र प्रमुखों के बीच वार्ता हो सकती है। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इसी तरह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मोदी से मिलना चाहते थे, किंतु मोदी ने उनको बिल्कुल भाव नहीं दिया। एक तरफ पाकिस्तान भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो दूसरी तरफ बातचीत का दिखावा भी करना चाहता है। भारत ने चीन और पाकिस्तान को झटका देकर सही आईना दिखाया है। भारत की कूटनीति की तारीफ पाकिस्तान के लोग भी कर रहे हैं।
एससीओ में मोदी की भूमिका
