वही हुआ, जिसका डर था। सरकार और चुनाव आयोग ने असम समेत देश के पांच राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लोगों की जान जोखिम में डाल दी। करीब डेढ़ महीने से जारी चुनावी कार्यक्रम अब जानलेवा साबित होने लगा है। ये हम नहीं, आंकड़े बोल रहे हैं। असम समेत इन पांच राज्यों के 1 अप्रैल से 14 अप्रैल तक के आंकड़े यही बता रहे हैं। एक राष्ट्रीय दैनिक के सौजन्य से मिली खबरों के मुताबिक तीन चरणों में असम में विधानसभा चुनाव आयोजित कराए गए और तीसरा व अंतिम चरण छह अप्रैल को आयोजित कराया गया। इस दौरान राज्य के मंत्रियों व नेताओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत कई राष्ट्रीय नेताओं की चुनावी रैलियों की भरमार रहीं और शक्ति प्रदर्शन के नाम पर लोगों भी खूब भीड़ भी जुटाई गई। भीड़ तो जुटी, पर एहतियात के नाम पर कुछ भी नहीं दिखा। क्या वक्ता और क्या श्रोता, कोरोना की सबने खिल्ली उड़ाई, जिसका परिणाम अब दिख रहा है। आंकड़े बताते हैं कि पांचों चुनावी राज्यों में कोरोना संक्रमण दर सबसे अधिक असम में है। असम में अप्रैल के पहले दो हफ्तों यानी चौदह अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च तक असम में संक्रमितों की कुल संख्या 537 थी, जो 14 अप्रैल को 3398 तक पहुंच गया। यानी संक्रमितों की संख्या में यह इजाफा 532 फीसदी हुई। आंकडों के मुताबिक असम में 16 से 31 मार्च के बीच केवल 537 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। मतलब उस दौरान स्थिति काफी बेहतर थी। लेकिन 1 से 14 अप्रैल के बीच के आंकड़े डरावने हैं। इन 14 दिनों में रिकॉर्ड 3398 लोग कोरोना की चपेट में आ गए यानी अब कोरोना की रफ्तार 532 प्रतिशत हो चुकी है। मौत के मामलों में भी ये तेजी देखने को मिली। 16 से 31 मार्च तक जहां केवल 6 लोगों ने जान गंवाई थी, वहीं इन 14 दिनों के अंदर अब तक 15 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। असम के बाद दूसरे स्थान पर प. बंगाल है, जहां संक्रमितों में इजाफे की दर 420 फीसदी है। मालूम हो कि बंगाल में विधानसभा चुनाव के आठ चरणों में से चार संपन्न हो चुके हैं और शनिवार 17 अप्रैल को पांचवां चरण होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक देश के कई बड़े नेता इस समय बंगाल में खूब चुनावी रैलियां, रोड शो और सभाएं कर रहे हैं। इन रैलियों में थोड़े-बहुत नहीं बल्कि लाखों की भीड़ जुट रही है। इनमें भी 80 फीसदी लोग बगैर मास्क के होते हैं। मंच पर भी आपको एक-दो ही लोग ऐसे दिखेंगे जो मास्क पहने रहते हैं। मतलब कोविड नियमों की खूब धज्जियां उड़ रहीं हैं। इसका असर भी अब देखने को मिलने लगा है। बंगाल में पिछले 14 दिन के अंदर कोरोना की रफ्तार में 420 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। यहां 16 से 31 मार्च तक केवल 8,062 मरीज मिले थे, जो इस बार 1-14 अप्रैल के बीच बढ़कर 41 हजार 927 हो गए। इस दौरान मौतें भी खूब हुईं। मार्च में जहां केवल 32 लोगों ने जान गंवाई, वहीं इन 14 दिनों के अंदर अब तक 127 लोगों की मौत हो चुकी है। इन दोनों प्रदेशों के अलावा क्रमवार तमिलनाडु में 159 फीसदी, केरल में 103 प्रतिशत और पुड्डुचेरी में 165 प्रतिशत कोरोना केस बढ़े हैं।