मुंबई: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। लेकिन, इस लक्ष्य को पाने के लिए बहुत सी चीजों को फिर से आकार देना पड़ेगा। इसमें डिजिटलीकरण, शिक्षा और बुनियादी ढांचा सबसे महत्वपूर्ण साधन हैं। यानी इन्हीं के प्रदर्शन के दम पर हमारा विकासशील से विकसित देश बनने का सपना पूरा हो सकेगा। एलारा कैपिटल के कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा कि विभिन्न वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले वृद्धि की राह पर सबसे तेज गति से दौड़ रही है। इसके लिए सरकार की ओर से कई प्रयास किए गए हैं। अगले 25 वर्षों के सुधारों और विकास के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब तक भारत स्वतंत्रता की पहली शताब्दी मनाएगा, हमें बहुत सारी चीजों को ठीक करना होगा ताकि हम तब तक एक विकसित देश बन सकें। सरकार डिजिटलीकरण, शिक्षा और अधिक-से-अधिक बुनियादी ढांचे का विकास कर रही है ताकि देश के अंदरूनी इलाके शहरों से अलग-थलग न रह सकें। सरकार की कर-जीडीपी अनुपात बढ़ाने की योजना के सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि कर आधार को बढ़ाना एक ऐसा मुद्दा है, जिसके लिए बहुत अधिक परामर्श और विश्लेषण की जरूरत है। लेकिन, हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ऐसा अधिक उचित ढंग से और तकनीक की मदद से किया जाएगा। अभी देश में अभी कर-जीडीपी अनुपात करीब 10 फीसदी है। उन्होंने कहा कि आयकर फाइलिंग की बढ़ती संख्या से कर आधार के मामले में कुछ प्रगति होने की उम्मीद जगी है। भारतीय बांड को वैश्विक सूचकांक में शामिल करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि महामारी के बाद से कई चीजें बदल गई हैं। खासकर कोषों की आमद के मामले में ऐसा ही है। ज्यादातर मामलों में फंड की आमद उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। हालांकि, मैं जल्द ही इस पर तार्किक निष्कर्ष की उम्मीद करती हूं। वित्त मंत्री का बयान ऐसे समय पर आया है, जब माना जा रहा था कि सॉवरेन बांड इस महीने की शुरुआत में जेपी मॉर्गन के सरकारी बांड सूचकांक (उभरते बाजार) का हिस्सा बन सकते हैं। ग्लोबल बांड सूचकांकों में भारतीय बांड के शामिल होने पर बाजार की करीबी नजरें हैं क्योंकि इससे सॉवरेन बांड में अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता खुल सकता है। भारत में बांड्स में विदेशी निवेश की सीमा तय है। विदेशी निवेशक कुल जारी किए गए बांड के एक निश्चित फीसदी तक ही इसमें निवेश कर सकते हैं। लेकिन, सरकार ने विदेशी निवेशकों को एक विशेष श्रेणी के जरिए बांड में निवेश की इजाजत दी है।