खारूपेटियाः पर्युषण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की पूजा-अर्चना भक्ति-भाव से की गई। इस अवसर पर उत्तम तप धर्म के बारे में बताते हुए आकाश जैन भया ने कहा कि उत्तम तप निरवांछित पाले, सो नर कर्म शत्रु को टाले, अर्थात् शास्त्रों में वर्णित बारह प्रकार के तप से जो मानव अपने तन मन जीवन को परिमार्जन या शुद्ध करता है। उसके समस्त जन्मो-जन्मो के कर्म नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि अगर मनुष्य जीवन मिला है तो तप कर लो। तप से ही जीवन महान बनता है। इच्छाओं का निरोध करना ही तप कहलाता है। जो तपता नहीं, वह पकता नहीं। उत्तम तप धर्म के पावन दिन मूलनायक भगवान महावीर के कलशााभिषेक करने गुवाहाटी से आये श्रावक सोहनलाल संजय गंगवाल को सौभाग्य प्राप्त हुआ। मालूम हो कि सभी धर्मालंबियों ने उत्तम तप धर्म की पूजा-अर्चना की और धर्म का लाभ लिया।