कांग्रेस के भीतर से राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए पिछले कुछ वर्षों आवाज उठ रही है। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद से सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के रूप में काम कर रही हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अध्यक्ष पद के लिए अगस्त में चुनाव होना था, किंतु ऐसा नहीं हो पाया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में फिर से अध्यक्ष पद के लिए हलचल तेज हो गई। आजाद कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक थे, जिन्होंने अपना लगभग पूरा जीवन कांग्रेस में बिता दिया। उनके द्वारा पार्टी से इस्तीफा देने एवं पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाने के बाद फिर से कांग्रेस में बदलाव की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। गांधी परिवार राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अध्यक्ष पद पर बिठाना चाहता है कि ताकि उनकी पकड़ बनी रहे। अशोक गहलोत राजस्थान की गद्दी को छोड़ना नहीं चाहते हैं, क्योंकि उनकी पकड़ वहां कमजोर हो सकती है। गहलोत नहीं चाहते हैं कि सचिन पायलट को राजस्थान में बढ़त मिल जाए। आजाद के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के जी-23 के नेता फिर से सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की आजाद के साथ हुई गुप्त बैठक ने पार्टी में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। आजाद से पहले कपिल सिब्बल, जितिन प्रसाद, सुनील जाखड़, कैप्टन अमरिंदर सिंह एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे पुराने कांग्रेसी नेता पार्टी का दामन छोड़ चुके हैं। राहुल गांधी द्वारा अध्यक्ष पद लेने से स्पष्ट इनकार करने के बाद पार्टी हाई कमान आगामी 17 अक्तूबर को अध्यक्ष पद के लिए मतदान कराने का निर्णय लिया है। अगर चुनाव हुआ तो 19 अक्तूबर को नए अध्यक्ष की घोषणा हो जाएगी। चुनाव के लिए 22 सितंबर को अधिसूचना  जारी होगी, जबकि 24 सितंबर से 30 सितंबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। जी-23 के नेता शशि थरूर ने भी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। मालूम हो कि अगस्त 2020 में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा तथा कांग्रेस 21 अन्य नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने का अनुरोध किया था। नए अध्यक्ष के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 9000 एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के 1500 सदस्य मतदान करेंगे। वर्ष 2017 में कांग्रेस संगठन का चुनाव हुआ था। गुलाम नबी आजाद का कांग्रेस से इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। आजाद गांधी परिवार के विश्वासपात्रों में शामिल रहे हैं। वे लंबे समय से पार्टी की नीतियों से नाराज चल रहे थे। उनका कहना था कि कांग्रेस को भारत जोड़ो यात्र की जगह कांग्रेस जोड़ो यात्रा पर जोर देना चाहिए ताकि पार्टी को फिर से मजबूत किया जा सके। राहुल गांधी की अपरिपक्व एवं बचकाना हरकत के कारण जमीन से जुड़े पुराने कांग्रेसी नेता दूर होते जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में भी चुनाव होने वाले हैं। ऐसी स्थिति में आजाद का कांग्रेस से नाता तोड़ना पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति होगी। जम्मू-कश्मीर के 30 विधानसभा क्षेत्रों में आजाद का खासा प्रभाव है। अगर वे अलग क्षेत्रीय पार्टी बनाकर चुनाव लड़ते हैं तो उससे भाजपा को फायदा मिल सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी मित्रता राज्यसभा में जगजाहिर हो चुकी है। अगर भाजपा और आजाद की पार्टी में गठजोड़ होता है तो जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस, पीडीपी एवं नेशनल कांफ्रेंस का सत्ता तक पहुंचने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा।